{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Aage Badhenge | Ali Sardar Jafri","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/03efac14\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":178,"description":"आगे बढ़ेंगे | अली सरदार जाफ़री | आरती जैन\n\nवो बिजली-सी चमकी, वो टूटा सितारा,\nवो शोला-सा लपका, वो तड़पा शरारा,\nजुनूने-बग़ावत ने दिल को उभारा,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nगरजती हैं तोपें, गरजने दो इनको\nदुहुल बज रहे हैं, तो बजने दो इनको,\nजो हथियार सजते हैं, सजने दो इनको\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nकुदालों के फल, दोस्तों, तेज़ कर लो,\nमुहब्बत के साग़र को लबरेज़ कर लो,\nज़रा और हिम्मत को महमेज़ कर लो,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nविज़ारत की मंज़िल हमारी नहीं है,\nये आंधी है, बादे-बहारी नहीं है,\nजिरह हमने तन से उतारी नहीं है,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nहुकूमत के पिंदार को तोड़ना है,\nअसीरो-गिरफ़्तार को छोड़ना है,\nजमाने की रफ्तार को मोड़ना है,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nचट्टानों में राहें बनानी पड़ेंगी,\nअभी कितनी कड़ियां उठानी पड़ेंगी,\nहज़ारों कमानें झुकानी पड़ेंगी,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nहदें हो चुकीं ख़त्म बीमो-रजा की,\nमुसाफ़त से अब अज़्मे-सब्रआज़मां की,\nज़माने के माथे पे है ताबनाकी,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nउफ़क़ के किनारे हुए हैं गुलाबी,\nसहर की निगाहों में हैं बर्क़ताबी,\nक़दम चूमने आई है कामयाबी,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nमसाइब की दुनिया को पामाल करके,\nजवानी के शोलों में तप के, निखर के,\nज़रा नज़्मे-गीती से ऊंचे उभर के,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!\n\nमहकते हुए मर्ग़ज़ारों से आगे,\nलचकते हुए आबशारों से आगे,\nबहिश्ते-बरीं की बहारों से आगे,\nबढ़ेंगे, अभी और आगे बढ़ेंगे!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}