{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Mobile | Manglesh Dabral","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/060fc5e1\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":172,"description":"मोबाइल । मंगलेश डबराल\n\nवे गले में सोने की मोटी जंज़ीर पहनते हैं\n\nकमर में चौड़ी बेल्ट लगाते हैं\nऔर मोबाइलों पर बात करते हैं\n\nवे एक आधे अँधेरे और आधे उजले रेस्तराँ में घुसते हैं\nऔर खाने और पीने का ऑर्डर देते हैं\n\nवे आपस में जाम टकराते हैं\nऔर मोबाइलों पर बात करते हैं\n\nउनके मोबाइलों का रंग काला है या आबनूसी\nचाँदी जैसा या रहस्यमय नीला\n\nउनके आकार पतले छरहरे या सुडौल आकर्षक\nवे अपने नए मोबाइलों को अपनी नई प्रेमिकाओं की तरह देखते हैं\n\nऔर उन पर बात करते हैं\nवे एक-दूसरे के मोबाइल हाथ में लेकर खेलते हैं\n\nऔर उनकी विशेषताओं का वर्णन करते हैं\nवे एक अँधेरे-उजले रेस्तराँ में घुसते हैं\n\nऔर ज़्यादा खाने और ज़्यादा पीने का ऑर्डर देते हैं\nवे धरती का एक टुकड़ा ख़रीदने का ऑर्डर देते हैं\n\nवे जंगल पहाड़ नदी पेड़\nऔर उनमें दबे खनिज को ख़रीदने का ऑर्डर देते हैं\n\nऔर मोबाइलों पर बात करते हैं\nवे पता करते रहते हैं\n\nकहाँ कितना खा और पी सकते हैं\nकहाँ कितनी संपत्ति बना सकते हैं\n\nवे पता करते रहते हैं\nधरती कहाँ पर सस्ती है खाना-पीना कहाँ पर महँगा है\n\nवे फिर से एक अँधेरे-उजले रेस्तराँ में बैठते हैं\nऔर सस्ती धरती और महँगे खाने-पीने का ऑर्डर देते हैं\n\nऔर मोबाइलों पर बात करते हैं\nवे फिर से अपनी जंज़ीरें ठीक करते हैं बेल्ट कसते हैं\n\nवे अपने मोबाइलों को अपने हथियारों की तरह उठाते हैं\nऔर फिर से कुछ ख़रीदने का आर्डर देने चल देते हैं।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}