{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Karbala | Rajesh Joshi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/09dd7a86\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":139,"description":"कर्बला।  राजेश जोशी\nपानी पियो तो याद करो प्यास इमाम हुसैन की!\nपानी पियो तो शुक्रिया अदा करो बादलों का\nनदियों, तालाबों और समुंदरों का\nशुक्रिया अदा करो समुंदरों का\nसमुद्रों का पानी पीने के काम न आए तो भी!\nपानी पियो तो शुक्रिया अदा करो कुम्हारों का\nजिन्होंने बनाए पृथ्वी की तरह गोल मटके\nऔर बहुत सुंदर सुराहियाँ जिनकी गरदनें\nसुंदर स्त्रियों की तरह पतली और लंबी हैं!\nपानी पियो तो सोचो।\nकाटी तो नहीं तुमने दूसरों की नहरें\nकिसी की प्यास के रास्ते में तुम यज़ीद तो नहीं?\nपानी पियो तो याद करो उस शख़्स को\nतपते रास्तों में जिसने दिया\nगुड़ और पानी\nजिसने रास्तों में बिठाईं ठंडे पानी की सबीलें\nउसका शुक्रिया अदा करो!\nउसका भी जिसने कम से कम इच्छा की\nप्याऊ लगाने की!\nपानी पियो तो सोचो\nखारा तो नहीं हुआ है तुम्हारी आत्मा का जल\nपानी पियो तो सोचो नन्हे अली असग़र के बारे में\nसोचो कहीं अंधे तीर में तो नहीं बदल गई है\nतुम्हारी घृणा!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}