{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Chunaav | Anamika","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/1074bbc3\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":243,"description":"चुनाव - अनामिका\n\nअपनी चपलता मुद्राओं में भी नर्तक\nसम तो नहीं भूलता\nपहीया नहीं भूलता अपना धूरा\nतू काहे भूल गई अनामिका\nतू कौन है याद रख\nशास्त्रों ने कहा\nतू-तू मैं-मैं करती दुनिया ने उंगली उठाई\nआखिर तू है कौन किस खेत की मूली\nमैं तो घबरा ही गई\nघबराकर सोचा\nइस विषम जीवन में मेरा सम कौन भला\nनाम तक कि कोई चौहत दी\nतो मुझको मिली नहीं\nयों ही पुकारा कि कर किये लोग अनामिका\nएक अकेला शब्द अनामिका\nआगे नाथ न पीछे पगह\nपापा ने तो नाम रखते हुए की होगी यह कल्पना\nकि नाम रूप के झमेले बांधे नहीं मुझको\nऔर मैं अगाध ही रहूँ\nआध्या जैसी\nघूमूँ-फिरूँ जग में \nबन कर जगतधात्रि जगत माता\nचाहती हूँ कि साकार करूं \nबेचारे पापा की कल्पना\nऔर भूल जाऊँ घेरे बंदियाँ\nलेकिन हर पग पर हैं बाड़े\nअजकजा जाती हूँ जब पानी पूछते हुए\nलोग पूछ लेते हैं आज तलक \nआप लोग होते हैं कौन\nरह जाती हूँ मौन\nअपनी जड़ें टटोलती\nपर मज़े की बात यह है\nकि एक ख़ुफ़िया कार्रवाई\nएकदम से शुरू हो जाती है तब से ही \nमेरे उद्गम स्रोतों की\nऔर ताड़ से गिरकर सीधा खजूर पर अटकती हूँ\nजब मेरी जाती के लोग\nझाड़ देते हैं रहस्यवाद मेरा\nऔर मिलाकर हाथ कहते हैं \nऐन चुनाव की घड़ी\nहम एक ही तो हैं मैडम\nएक कुल गोत्र है हमारा\nअब की चुनाव में खड़ा हूँ\nआपके भरोसे \nमत याद रख \nभूल जा\nगाता है जोगी\nसारंगी पर\nमुस्का कर बढ़ जाती हूँ आगे","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}