{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Hey Meri Uttara | Ashutosh Sharma","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/14f3e1e9\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":228,"description":" हे मेरी उत्तरा! । आशुतोष शर्मा\n\nमेरे शस्त्र की धारमयी रति को\nतुम्हारी भाषा के वैराग्य ने छीन लिया था\nहे मेरी उत्तरा!\nमेरे रण में जाने से पूर्व\nतुम्हारे ऑँचल का सतीत्व\nमुझे आगाह कर रहा था\nएक भयंकर सामूहिक पाप के प्रति\nमेरे मातुल की वंशी से\nएक मौन भाप की ध्वनि आ रही थी\nगांडीव अपने चरण मुझसे दूर हटा रहा था\nआधा सा लग रहा था पिता भीम का आश्वासन\nहै मेरी उत्तरा!\nतुम्हारे बाल वैधव्यता से\nकुरुक्षेत्र के मंडप में होगा मेरा विवाह\nमैं यह जानता था कि\nधर्मक्षेत्र मेरी शोणित के योगदान का आकांक्षी है।\nइतिहास मेरी वीरता का आनन्द लेना चाहता है।\nहे मेरी उत्तरा!\nहमारे प्रेम का साहित्य\nछंदबद्ध नहीं है\nअसंकलित, अज्ञात कहीं\nमेरे मस्तक की भांति\nजयद्रथ के पैरों तले\nया सेनापतियों के विजयी रथों के नीचे\nसिपाहियों के शर्वों सा\nइतिहासहीन पड़ा है\nगौरव करने वाली जातिर्यों का सच\nकलम का सौदा करने वाले घातियों ने खा लिया है\nहे मेरी उत्तरा!\nचक्रवर्तियों की सभा में\nपासों से तुम्हारी नियति को न खेल जाए कोई राजवंश\nतुम्हारा दाव पर लग जाना\nमेरे पौरुष पर घाव सा न लग जाए\nइसी चिन्ता का नाम महाभारत है।\nहे मेरी उत्तरा!\nअपने ललाट का सिन्दूर\nमेरे भीगे पीताम्बर से पोंछना\nसंभवतः तुम्हारी माँग की अरुणिमा में और वृदधि हो जाय\nव मेरा बलिदान कहीं और गौरवशाली\nऔर पुकारूं मैं तुम्हें\nनिर्जीव पड़े श्रृंगारों से\nहे मेरी संगिनी!\nहे मेरी अर्धागिनी!\nहे मेरी वीरांगना!\nहे मेरी उत्तरा!\nहे मेरी उत्तरा!\nहे मेरी उत्तरा!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}