{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Maika | Anwesha Rai 'Mandakini'","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/204c895d\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":139,"description":" मायका  | अन्वेषा राय 'मंदाकिनी'हिंदी के शब्दकोश मेंप्रत्येक शब्द का एक अर्थ लिखा है,मगर एक शब्द है जिसका अर्थना मुंशी जी को पता है,ना महादेवी कोऔर ना ही मुझे..“मायका\"पढ़ने - पढाने के लिएहमेंमायके का मतलब“मा का घर\" रटवा दिया गया है ।!पर हर स्त्री,जब भी लांघती हैससुराल की दहलीज़,मायके जाने के लिए,तो आगे बढने से पूर्वउसके मन मेंएक सवालखूब उधम करता है !!\"माँ का घर कहाँ है!\"हिंदी ने लोगों कोमायका शब्द तो दे दिया,मगर स्त्रियों कोउनकी माँ का घर नहीं दे पाईया उनका ख़ुद का घरजिसे उनकी आने वाले पीढ़ी की बेटीमाँ का घर कह सके !!शायद इसीलिए कुछ पुरुष आज भी कहते हैं“हिन्दी पढ़ के क्या होगा ?\"हर स्त्री ढूंढ रही हैअपना ठिकाना शब्दों में ही कहीं..इसीलिए काम पर जाने कोघर से निकलती हर स्त्रीऔरउसकी माँया शायदउनकी भी माँ...अपना घर तलाशती फ़िर रही है...ताकि उसकी बेटी जान सकेये मायका है !!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}