{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Suraj | Akanksha Pandey","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/23b8a40e\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":252,"description":"सूरज |  आकांक्षा पांडे\n\nतुम, \nहां तुम्हीं\nतुमसे कुछ बताना  चाहती हूँ।\nमाना अनजान हूं\nदिखती नादान हूं \nकुछ ज्यादा कहने को नहीं है\nकोई बड़ा फरमान नही है\nबस इतना दोहराना है\nजग में सबने जाना है\nपीड़ा घटे बताने से\nरात कटे बहाने से\nलेकिन की थोड़ी कंजूसी\nकरके इतनी कानाफूसी\nबात का बतंगड़ बनाया\nऐसा मायाजाल पिरोया\n\nकि अब डरते हो तुम \nकहने से अपने मन की \nदेने दुहाई तन्हा दिल की\nकरना साझा अपना \nबिसरा कोई दुख पुराना \nकिसी अपने का दूर जाना \nसब रखते हो तकिए के नीचे \nगठरी बांध कही कोने में \nचूक से भी खोल न दे \nजुबां कही बोल न दे \nबिखर न जाए दुख बथेरे\nआंसू शायद फिर न ठहरे \n\nमाना है ये खौफ बड़ा \nचौखट छांके पिशाच खड़ा \nपर एक कदम की दूरी है \nसांझ के बाद ही नूरी है\nथाम ज़रा दिल तुम अपना \nधीरे से आगे बढ़ना \nहाथ मिलेंगे बहुतेरे \nतुम किसी एक से \nरिश्ता गढ़ना \nथोड़ा तुम उसकी सुनना \nकुछ थोड़ी अपनी कहना \n\nहौले हौले बातों से \nखुल जाएंगी गांठे मन की\nहो जाएगा दिल हल्का \nजब धार बहेगी लफ्जों की\nहल्के हल्के कदमों से फिर\nजाना तुम किवाड़ के पास \nतुलु ए सेहर या चांदनी रात \nदोनों देंगे तुम्हे कुछ आस\nपिशाच थोड़ा घबराएगा \nभड़केगा, गुर्राएगा \nफिर भी तुम धीरज रखना \nहाथ पकड़ आगे बढ़ना \n\nमुंह छोटी पर बात बड़ी \nबस इतना ही कहना है\nदीर्घकाल के शिशिर के बाद \nफागुन में सब खिलता है\nछः महीने के बाद ही सही \nध्रुव पर भी सूरज उगता है","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}