{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ramdas | Raghuvir Sahay","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/270950c9\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":156,"description":"रामदास | रघुवीर सहायचौड़ी सड़क गली पतली थीदिन का समय घनी बदली थीरामदास उस दिन उदास थाअंत समय आ गया पास थाउसे बता यह दिया गया था उसकी हत्या होगीधीरे-धीरे चला अकेलेसोचा साथ किसी को ले लेफिर रह गया, सड़क पर सब थेसभी मौन थे सभी निहत्थेसभी जानते थे यह उस दिन उसकी हत्या होगीखड़ा हुआ वह बीच सड़क परदोनों हाथ पेट पर रखकरसधे कदम रख करके आयेलोग सिमटकर आँख गड़ायेलगे देखने उसको जिसकी तय था हत्या होगीनिकल गली से तब हत्याराआया उसने नाम पुकाराहाथ तौलकर चाकू  माराछूटा लोहू का फ़व्वाराकहा नहीं था उसने आख़िर उसकी हत्या होगीभीड़ ठेलकर लौट गया वहमरा पड़ा है रामदास यहदेखो देखो बार-बार कहलोग निडर उस जगह खड़े रहलगे बुलाने उन्हें जिन्हें संशय था हत्या होगी","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}