{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Daudte Daudte Pyar | Nilesh Raghuvanshi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/2bc7f777\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":139,"description":"दौड़ते-दौड़ते प्यार।  नीलेश रघुवंशी वह दौड़ रहा हैदिन ब दिन उसकी भागमभाग बढ़ती ही जा रही हैवह जितना दौड़ता जाता है सड़कें उतनी लंबी होती जाती हैंदिन ब दिन पसरती सड़कें खत्म होने का नाम ही नहीं लेतींमैं उसे प्यार करती हूँ और उसकी दौड़ से भयभीत होती हूँभय खाती हूँ उसकी दिनचर्या से जिसमें कुछ पल भी नहीं उसके पासकोसती हूँ बिना पेड़ और बिना छाँव वाले चौराहों औरसड़कों के किनारों कोउकसाते हैं जो उसे और-और दौड़ने के लिएथकान से उसकी थक जाते हैं कपड़ेपसर जाती है थकान उससे पहले बिस्तर मेंनींद में उसकी गोल घुमावदार सड़कें रास्ते जिनमें गुम होते हुएकसमसाती हैं हमारी दोपहरें उसकी थकी आँखों मेंमैं उससे प्यार करती हूँ और प्यार करते-करते शामिल हो गई दौड मेंअब हम दोनों दौड रहे हैंहम बैठे भी नहीं हैं और किसी के साथ खड़े भी नहीं हैंहम तो बस दौडते जा रहे हैंदौडते-दौडते हमने हमारी ही इच्छाओं को मार डालाहाय री दौड़ तूने दौड़ते-दौड़ते भी हमें प्यार न करने दियामैं दौड़ से चिढ़ती हूँ लेकिन उससे प्यार करती हूँथका हारा सांसारिक प्यार हमारा","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}