{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Namak | Anamika","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/34f38ee4\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":154,"description":"नमक - अनामिकानमक दुख है धरती का और उसका स्वाद भी!पृथ्वी का तीन भाग नमकीन पानी हैऔर आदमी का दिल नमक का पहाड़कमज़ोर है दिल नमक का,कितनी जल्दी पसीज जाता है!गड़ जाता है शर्म से जब फेंकी जाती हैं थालियाँदाल में नमक कम या ज़रा तेज़ होने पर!वो जो खड़े हैं न-सरकारी दफ्तर-शाही नमकदान हैं।बड़ी नफ़ासत से छिड़क देते हैं हरदमहमारे जले पर नमक!जिनके चेहरे पर नमक है-पूछिए उन औरतों से-कितना भारी पड़ता है उनकोउनके चेहरे का नमक!जिन्हे नमक की कीमतकरनी होती है अदा-उन नमकहलालों सेरंज रहता   है महासागर।दुनिया में होने न दीं उन्होंने क्रांतियाँ,रहम खा गए दुश्मनों पर!गाँधी जी जानते थे नमक की कीमतऔर अमरूदों वाली मुनिया भी!दुनिया में कुछ और रहे-न-रहे-रहेगा नमक-ईश्वर के आँसू और आदमी का पसीना-ये ही वो नमक है कि जिससे थिराई रहेगी ये दुनिया।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}