{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Abhinay | Manglesh Dabral","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/368fcf16\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":184,"description":"\nअभिनय । मंगलेश डबराल\nएक गहन आत्मविश्वास से भरकर\nसुबह निकल पड़ता हूँ घर से\nताकि सारा दिन आश्वस्त रह सकूँ\nएक आदमी से मिलते हुए मुस्कराता हूँ\nवह एकाएक देख लेता है मेरी उदासी\nएक से तपाक-से हाथ मिलाता हूँ\nवह जान जाता है मैं भीतर से हूँ अशांत\nएक दोस्त के सामने ख़ामोश बैठ जाता हूँ\nवह कहता है तुम दुबले बीमार क्यों दिखते हो\nजिन्होंने मुझे कभी घर में नहीं देखा\nवे कहते हैं अरे आप टी.वी. पर दिखे थे एक दिन\nबाज़ारों में घूमता हूँ नि:शब्द\nडिब्बों में बंद हो रहा है पूरा देश\nपूरा जीवन बिक्री के लिए\nएक नई रंगीन किताब है जो मेरी कविता के\nविरोध में आई है\nजिसमें छपे सुंदर चेहरों को कोई कष्ट नहीं\nजगह-जगह नृत्य की मुद्राएँ हैं विचार के बदले\nजनाब एक पूरी फ़िल्म है लंबी\nआप ख़रीद लें और भरपूर आनंद उठाएँ\nशेष जो कुछ है अभिनय है\nचारों ओर आवाज़ें आ रही हैं\nमेकअप बदलने का भी समय नहीं है\nहत्यारा एक मासूम के कपड़े पहनकर चला आया है\nवह जिसे अपने पर गर्व था\nएक ख़ुशामदी की आवाज़ में गिड़गिड़ा रहा है\nट्रेजडी है संक्षिप्त लंबा प्रहसन\nहरेक चाहता है किस तरह झपट लूँ\nसर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}