{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ab Main Suraj Ko Nahi Doobne Dungi | Sarveshwar Dayal Saxena","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/3b24c502\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":177,"description":" अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा | सर्वेश्वरदयाल सक्सेना\n\nअब मैं सूरज को नहीं डूबने दूंगा।\nदेखो मैंने कंधे चौड़े कर लिये हैं\nमुट्ठियाँ मजबूत कर ली हैं\nऔर ढलान पर एड़ियाँ जमाकर\nखड़ा होना मैंने सीख लिया है।\n\nघबराओ मत\nमैं क्षितिज पर जा रहा हूँ।\nसूरज ठीक जब पहाडी से लुढ़कने लगेगा\nमैं कंधे अड़ा दूंगा\nदेखना वह वहीं ठहरा होगा।\n\nअब मैं सूरज को नही डूबने दूँगा।\nमैंने सुना है उसके रथ में तुम हो\nतुम्हें मैं उतार लाना चाहता हूं\nतुम जो स्वाधीनता की प्रतिमा हो\nतुम जो साहस की मूर्ति हो\nतुम जो धरती का सुख हो\nतुम जो कालातीत प्यार हो\nतुम जो मेरी धमनी का प्रवाह हो\nतुम जो मेरी चेतना का विस्तार हो\nतुम्हें मैं उस रथ से उतार लाना चाहता हूं।\n\nरथ के घोड़े\nआग उगलते रहें\nअब पहिये टस से मस नही होंगे\nमैंने अपने कंधे चौड़े कर लिये है।\n\nकौन रोकेगा तुम्हें\nमैंने धरती बड़ी कर ली है\nअन्न की सुनहरी बालियों से\nमैं तुम्हें सजाऊँगा\nमैंने सीना खोल लिया है\nप्यार के गीतो में मैं तुम्हे गाऊँगा\nमैंने दृष्टि बड़ी कर ली है\nहर आँखों में तुम्हें सपनों सा फहराऊँगा।\n\nसूरज जायेगा भी तो कहाँ\nउसे यहीं रहना होगा\nयहीं हमारी सांसों में\nहमारी रगों में\nहमारे संकल्पों में\nहमारे रतजगों में\nतुम उदास मत होओ\nअब मैं किसी भी सूरज को\nनही डूबने दूंगा।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}