{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Political And Physical Maps Of India | Priyankshi Mohan","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/3d45fe14\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":140,"description":"पॉलिटिकल एंड फिज़ीकल मैप्स ऑफ इंडिया।  प्रियंक्षी मोहन अखबार के पीछे सेभेदती हैं पिता की आँखेंएक समय के बादमाँ के हाथ की बनीगर्म, फूली हुई रोटियां भीफफोले सी नज़र आती हैनकारेपन में इतनाघूम लिया है शहर किप्रेम करने के लिए तोमिल जाता है एक कोनामिल ही जाता है पर, \"क्या करते हो बेटा?\"जैसे सवालों से छुपने केलिए दूर दूर तक कोईजगह नज़र नहीं आती है\"दरवाज़े बाई तरफ खुलेंगे\"हर रोज़  सुन सुनकर भीपता नहीं चलता किआखिर जाना किस तरफ हैराशन की दुकान मेंजैसे ताखों से झांकते हैं चूहेउसी तरह बाप के दिलाएहुए महंगे कपड़ों की खालीजेबों से  बटुए झांकते हैभाइयों पर ज़िम्मा हैबहनों को ब्याहने काऔर बहनों कोहोने वाले पतियों कीबहनों का दहेज़ बनवाने का  हम उलझे थे सदाऔर उलझे ही रहेंगेऊन के गोलों की तरहहम देश बदलने काजज़्बा रखने वाले युवाएक दिन दिखते ही देखतेपॉलिटिकल और फिज़ीकलमैप्स ऑफ इंडिया में बदल ही जाते हैं","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}