{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Democracy Kya Hoti Hai | Ashok Chakradhar | Varun Grover","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/3df4d419\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":191,"description":"डेमोक्रेसी क्या होती है? - अशोक चक्रधर\nपार्क के कोने में \nघास के बिछौने पर लेटे-लेटे \nहम अपनी प्रियसी से पूछ बैठे— \nक्यों डियर! \nडेमोक्रेसी क्या होती है? \nवह बोलीं— \nतुम्हारे वादों जैसी होती है! \nइंतज़ार में, \nबहुत तड़पाती है, \nझूठ बोलती है \nसताती है, \nतुम तो आ भी जाते हो, \nये कभी नहीं आती है! \nएक विद्वान से पूछा \nवह बोले— \nहमने राजनीति-शास्त्र \nसारा पढ़ मारा, \nडेमोक्रेसी का मतलब है— \nआज़ादी, समानता और भाईचारा। \nआज़ादी का मतलब \nरामनाम की लूट है, \nइसमें गधे और घास \nदोनों को बराबर की छूट है। \nघास आज़ाद है कि \nचाहे जितनी बढ़े, \nऔर गधे स्वतंत्र हैं कि \nलेटे-लेटे या खड़े-खड़े \nकुछ भी करें, \nजितना चाहें इस घास को चरें। \nऔर समानता! \nकौन है जो इसे नहीं मानता? \nहमारे यहाँ— \nग़रीबों और ग़रीबों में समानता है, \nअमीरों और अमीरों में समानता है, \nमंत्रियों और मंत्रियों में समानता है, \nसंत्रियों और संत्रियों में समानता है। \nचोरी, डकैती, सेंधमारी, बटमारी \nराहज़नी, आगज़नी, घूसख़ोरी, जेबकतरी \nइन सबमें समानता है। \nबताइए, कहाँ असमानता है? \nऔर भाईचारा! \nतो सुनो भाई! \nयहाँ हर कोई \nएक-दूसरे के आगे \nचारा डालकर \nभाईचारा बढ़ा रहा है। \nजिसके पास \nडालने को चारा नहीं है \nउसका किसी से \nभाईचारा नहीं है। \nऔर अगर वो बेचारा है \nतो इसका हमारे पास \nकोई चारा नहीं है। \nफिर हमने अपने \nएक जेलर मित्र से पूछा— \nआप ही बताइए मिस्टर नेगी। \nवह बोले— \nडेमोक्रेसी? \nआजकल ज़मानत पर रिहा है, \nकल सींखचों के अंदर दिखाई देगी। \nअंत में मिले हमारे मुसद्दीलाल, \nउनसे भी कर डाला यही सवाल। \nबोले— \nडेमोक्रेसी? \nदफ़्तर के अफ़सर से लेकर \nघर की अफ़सरा तक \nपड़ती हुई फटकार है! \nज़बान के कोड़ों की मार है \nचीत्कार है, हाहाकार है। \nइसमें लात की मार से कहीं तगड़ी \nहालात की मार है। \nअब मैं किसी से \nये नहीं कहता, \nकि मेरी ऐसी-तैसी हो गई है, \nकहता हूँ— \nमेरी डेमोक्रेसी हो गई है! ","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}