{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ameeri Rekha | Kumar Ambuj","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/40f794fd\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":200,"description":"अमीरी रेखा -  कुमार अम्बुज\n\nमनुष्य होने की परंपरा है कि वह किसी कंधे पर सिर रख देता है\nऔर अपनी पीठ पर टिकने देता है कोई दूसरी पीठ\n\nऐसा होता आया है, बावजूद इसके\nकि कई चीज़ें इस बात को हमेशा कठिन बनाती रही हैं\n\nऔर कई बार आदमी होने की शुरुआत\nएक आधी-अधूरी दीवार हो जाने से, पतंगा, ग्वारपाठा\n\nया एक पोखर बन जाने से भी होती है\nया जब सब रफ़्तार में हों तब पीछे छूट जाना भी एक शुरुआत है\n\nबशर्ते मनुष्यता में तुम्हारा विश्वास बाक़ी रह गया हो\nनमस्कार, हाथ मिलाना, मुस्कुराना, कहना कि मैं आपके\n\nक्या काम आ सकता हूँ—\nये अभिनय की सहज भंगिमाएँ हैं और इनसे अब\n\nकिसी को कोई ख़ुशी नहीं मिलती\nशब्दों के मानी इस तरह भी ख़त्म किए जाते हैं\n\nतब अपने को और अपनी भाषा को बचाने के लिए\nहो सकता है तुम्हें उस आदमी के पास जाना पड़े\n\nजो इस वक़्त नमक भी नहीं ख़रीद पा रहा है\nया घर की ही उस स्त्री के पास\n\nजो दिन रात काम करती है\nऔर जिसे आज भी मज़दूरी नहीं मिलती\n\nबाज़ार में तो तुम्हारी छाया भी नज़र नहीं आ सकती\nउसे दूसरी तरफ़ से आती रोशनी दबोच लेती है\n\nवसंत में तुम्हारी पत्तियाँ नहीं झरतीं\nएक दिन तुम्हारी मुश्किल यह हो सकती है\n\nकि तुम नश्वर नहीं रहे\nतुम्हें यह देखने के लिए जीवित रहना पड़ सकता है\n\nकि सिर्फ़ अपनी जान बचाने की ख़ातिर\nतुम कितनी तरह का जीवन जी सकते हो\n\nजब लोगों को रोटी भी नसीब नहीं\nऔर इसी वजह से साठ-सत्तर रुपए रोज़ पर तुम एक आदमी को\n\nऔर सौ-डेढ़ सौ रुपए रोज़ पर एक पूरे परिवार को ग़ुलाम बनाते हो\nऔर फिर रात की अगवानी में कुछ मदहोशी में सोचते हो\n\nकभी-कभी घोषणा भी करते हो—\nमैं अपनी मेहनत और क़ाबलियत से ही यहाँ तक पहुँचा हूँ।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}