{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ek Aag To Baaki Hai Abhi | Pratibha Katiyar","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/4340663f\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":140,"description":"एक आग तो बाक़ी है अभी / प्रतिभा कटियारउसकी आँखों में जलन थीहाथों में कोई पत्थर नहीं था।सीने में हलचल थी लेकिनकोई बैनर उसने नहीं बनायासिद्धांतों के बीच पलने-बढ़ने के बावजूदनहीं तैयार किया कोई मैनिफेस्टो।दिल में था गुबार किधज्जियाँ उड़ा देसमाज की बुराइयों की ,तोड़ दे अव्यवस्थाओं के चक्रव्यूहतोड़ दे सारे बाँध मजबूरियों केगढ़ ही दे नई इबारतकि जिंदगी हँसने लगेकि अन्याय सहने वालों को नहीं करने वालों को लगे डरप्रतिभाओं को न देनी पड़ेंपुर्नपरीक्षाएँ जाहिलों के सम्मुखकि आसमान ज़रा साफ़ ही हो लेया बरस ही ले जी भर केकुछ हो तो कि सब ठीक हो जाएया तो आ जाए तूफ़ान कोईया थम ही जाए सीने का तूफ़ानलेकिन नहीं हो रहा कुछ भीबस कंप्यूटर पर टाइप हो रहा हैएक बायोडाटातैयार हो रही है फ़ेहरिस्तउन कामों को गिनाने कीजिनसे कई गुना बेहतर वो कर सकता है।सारे आंदोलनों, विरोधों और सिद्धान्तों कोलग गया पूर्ण विरामजब हाथ में आयाएक अदद अप्वाइंटमेंट लेटर....","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}