{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Mujhe Tez Dhar Wali Kavitayein Chahiye | Pratibha Katiyar","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/48750d36\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":184,"description":"मुझे तेज़ धार वाली कविताएँ चाहिए । प्रतिभा कटियारमुझे तेज़ धार वाली कविताएँ चाहिएजिनके किनारे से गुज़रते हुए लहूलुहान हो जाए जिस्मजिन्हें हाथ लगाते ही रिसकर बहने लगेसब कुछ सह लेने वाला सब्रमुझे ढर्रे पर चलती ज़िंदगी के गाल परथप्पड़ की तरह लगने वाली कविताएँ चाहिएकि देर तक सनसनाता रहे ढर्रे पर चलने वाला जीवनऔर आख़िर बदलनी ही पड़े उसे अपनी चालमुझे बारूद सरीखी कविताएँ चाहिएजो संसद में किसी बम की तरह फूटेंऔर चीरकर रख दें बहरी सरकारों केकानों के परदेमुझे बहुत तेज़ कविताएँ चाहिएसाँसों की रफ़्तार से भी तेज़समय की गति से आगे की कविताएँजो हत्यारों के मंसूबों को बेधती कविताएँऔर हो चुकी हत्याओं के ख़िलाफ़गवाह बनती कविताएँमुझे चाहिए कविताएँ जिनसेऑक्सीजन का काम लिया जा सकेजिन्हें घर से निकलते वक़्तकिसी सुरक्षा कवच की तरह पहना जा सकेजिनसे लोकतंत्र कोभीड़तंत्र होने से बचाया जा सकेमुझे चाहिए इतनी पवित्र कविताएँ कि उनके आगे सजदा किया जा सकेरोया जा सके जी भर केऔर सजदे से उठते हुए हल्का महसूस किया जा सकेमुझे चूल्हे की आग सी धधकती कविताएँ चाहिएखेतों में बालियों सी लहलहाती कविताएँ चाहिएमुझे मोहब्बत के नशे में डूबी कविताएँ चाहिएऔर भोली गिलहरी सी फुदकती कविताएँ चाहिएमुझे इस धरती परमनुष्यता की फ़सल उगाने वाली कविताएँ चाहिए।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}