{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Rahe Na Koi Bhookha-Nanga | Koduram Dalit","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/489fe8fc\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":177,"description":"रहे न कोई भूखा–नंगा | कोदूराम दलित\n\nपराधीन रहकर सरकस का शेर नित्य खाता है कोड़े,\nपराधीन रहकर बेचारे बोझा ढोते हाथी-घोड़े ।\n\nमाता–पिता छुड़ा, पिंजरे में रखा गया नन्हा–सा तोता,\nवह स्वतंत्र उड़ते तोतों को देख सदा मन ही मन रोता ।\n\nचाहे पशु हो, चाहे पंछी परवशता कब, किसको भायी,\nकहने का मतलब यह कि ‘परवशता’ होती दुखदायी।\n\nऐसी दुखदायी परवशता मानव को कैसे भायेगी?\nऔरों की दासता किसी को राहत कैसे पहुँचायेगी?\n\nजो गुलाम हैं, उन लोगों से उनके दुख: की बातें पूछो,\nऔ’ हैं जो आज़ाद मुल्क़ के उनके सुख की बातें पूछो।\n\nकहा सयानों ने सच ही है आज़ादी से जीना अच्छा,\nकिंतु ग़ुलामी में जिंदा रहने से मर जाना है अच्छा।\n\nरह करके गोरों की परवशता में हम क्या-क्या न खो चुके,\nपर पंद्रह अगस्त सन सैंतालीस को हम आज़ाद हो चुके।\n\nयह सब अपने अमर शहीदों के भारी जप-तप का फल है,\nमिलकर रहें, देश पनपावें तब तो फिर भविष्य उज्जवल है ।\n\nआज़ादी पर आँच न आवे लहर-लहर लहराए तिरंगा,\nहम संकल्प आज लेवें कि रहे न कोई भूखा–नंगा।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}