{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Benaras | Kedarnath Singh","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/4bb5838f\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":258,"description":"बनारस | केदारनाथ सिंह\n\nइस शहर मे वसंत\nअचानक आता है\n\nऔर जब आता है तो मैंने देखा है\nलहरतारा या मडुवाडीह की तरफ़ से\n\nउठता है धूल का एक बवंडर\nऔर इस महान पुराने शहर की जीभ\n\nकिरकिराने लगती है\nजो है वह सुगबुगाता है\n\nजो नहीं है वह फेंकने लगता है पचखियाँ\nआदमी दशाश्वमेध पर जाता है\n\nऔर पाता है घाट का आख़िरी पत्थर\nकुछ और मुलायम हो गया है\n\nसीढ़ियों पर बैठे बंदरों की आँखों में\nएक अजीब-सी नमी है\n\nऔर एक अजीब-सी चमक से भर उठा है\nभिखारियों के कटोरों का निचाट ख़ालीपन\n\nतुमने कभी देखा है\nख़ाली कटोरों में वसंत का उतरना!\n\nयह शहर इसी तरह खुलता है\nइसी तरह भरता\n\nऔर ख़ाली होता है यह शहर\nइसी तरह रोज़-रोज़ एक अनंत शव\n\nले जाते हैं कंधे\nअँधेरी गली से\n\nचमकती हुई गंगा की तरफ़\nइस शहर में धूल\n\nधीरे-धीरे उड़ती है\nधीरे-धीरे चलते हैं लोग\n\nधीरे-धीरे बजाते हैं घंटे\nशाम धीरे-धीरे होती है\n\nयह धीरे-धीरे होना\nधीरे-धीरे होने की एक सामूहिक लय\n\nदृढ़ता से बाँधे है समूचे शहर को\nइस तरह कि कुछ भी गिरता नहीं है\n\nकि हिलता नहीं है कुछ भी\nकि जो चीज़ जहाँ थी\n\nवहीं पर रखी है\nकि गंगा वहीं है\n\nकि वहीं पर बँधी है नाव\nकि वहीं पर रखी है तुलसीदास की खड़ाऊँ\n\nसैकड़ों बरस से\nकभी सई-साँझ\n\nबिना किसी सूचना के\nघुस जाओ इस शहर में\n\nकभी आरती के आलोक में\nइसे अचानक देखो\n\nअद्भुत है इसकी बनावट\nयह आधा जल में है\n\nआधा मंत्र में\nआधा फूल में है\n\nआधा शव में\nआधा नींद में है\n\nआधा शंख में\nअगर ध्यान से देखो\n\nतो यह आधा है\nऔर आधा नहीं है\n\nजो है वह खड़ा है\nबिना किसी स्तंभ के\n\nजो नहीं है उसे थामे हैं\nराख और रोशनी के ऊँचे-ऊँचे स्तंभ\n\nआग के स्तंभ\nऔर पानी के स्तंभ\n\nधुएँ के\nख़ुशबू के\n\nआदमी के उठे हुए हाथों के स्तंभ\nकिसी अलक्षित सूर्य को\n\nदेता हुआ अर्घ्य\nशताब्दियों से इसी तरह\n\nगंगा के जल में\nअपनी एक टाँग पर खड़ा है यह शहर\n\nअपनी दूसरी टाँग से\nबिल्कुल बेख़बर!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}