{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Kumhaar Akela Shaks Hota Hai | Shahanshah Alam","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/5121efef\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":185,"description":" कुम्हार अकेला शख़्स होता है | शहंशाह आलम \n\nजब तक एक भी कुम्हार है\nजीवन से भरे इस भूतल पर\nऔर मिट्टी आकार ले रही है\nसमझो कि मंगलकामनाएं की जा रही हैं\nनदियों के अविरत बहते रहने की\n\nकितना अच्छा लगता है\nमंगलकामनाएं की जा रही हैं अब भी\nऔर इस बदमिजाज़ व खुर्राट सदी में\nकुम्हार काम-भर मिट्टी ला रहा है\n\nकुम्हार जब सुस्ताता बीड़ी पीता है\nबीवी उसकी आग तैयार करती है\nऊर्जा से भरी हुई\n\nइतिहासकार इतिहास के बारे में चिंतित होते हैं\nश्रेष्ठजन अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने में भिड़े होते हैं\n\nअंधकार को चीरने हेतु\nख़ुद को तैयार कर रहा होता है कवि\n\nकुम्हार अकेला शख़्स होता है\nजो पैदल पुलिस के साथ\nशिकारी कुत्तों की भीड़ देखकर\nन बौखलाता है\nन उत्तेजित होता है\n\nहालांकि उसको पता है\nउसके बनाए बर्तन\nखिलौने, कैमरामैन\nअंतरिक्षयात्री, जहाज़ी\nअबाबील व दूसरी चिड़ियाँ\nसब के सब\nमौक़े की तलाश में हैं\nकिसी दूसरे ग्रह पर चले जाने के लिए\n\nकुम्हार अकेला शख़्स होता है\nजो नेपथ्य में बैठी उद्घोषिका से कहता है\nहम मिट्टी से और मिट्टी के रंगवाली\nपृथ्वी से प्रेम करते रहेंगे\nदुनिया के बचे रहने तक।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}