{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ujle Din Zaroor | Viren Dangwal","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/559707cb\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":178,"description":"उजले दिन ज़रूर - वीरेन डंगवाल\nनिराला को\nआएँगे, उजले दिन ज़रूर आएँगे\nआतंक सरीखी बिछी हुई हर ओर बर्फ़\nहै हवा कठिन, हड्डी-हड्डी को ठिठुराती\nआकाश उगलता अंधकार फिर एक बार\nसंशय-विदीर्ण आत्मा राम की अकुलाती\nहोगा वह समर, अभी होगा कुछ और बार\nतब कहीं मेघ ये छिन्न-भिन्न हो पाएँगे।\nतहख़ानों से निकले मोटे-मोटे चूहे\nजो लाशों की बदबू फैलाते घूम रहे\nहैं कुतर रहे पुरखों की सारी तस्वीरें\nचीं-चीं, चिक्-चिक् की धूम मचाते घूम रहे\nपर डरो नहीं, चूहे आख़िर चूहे ही हैं,\nजीवन की महिमा नष्ट नहीं कर पाएँगे।\nयह रक्तपात, यह मारकाट जो मची हुई\nलोगों के दिल भरमा देने का ज़रिया है\nजो अड़ा हुआ है हमें डराता रस्ते में\nलपटें लेता घनघोर आग का दरिया है।\nसूखे चेहरे बच्चों के उनकी तरल हँसी\nहम याद रखेंगे, पार उसे कर जाएँगे।\nमैं नहीं तसल्ली झूठ-मूठ की देता हूँ\nहर सपने के पीछे सच्चाई होती है\nहर दौर कभी तो ख़त्म हुआ ही करता है\nहर कठिनाई कुछ राह दिखा ही देती है।\nआए हैं जब हम चलकर इतने लाख वर्ष\nइसके आगे भी तक चलकर ही जाएँगे,\nआएँगे, उजले दिन ज़रूर आएँगे।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}