{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Char Prem Kavita | Madhusudan Anand","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/5ad20383\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":165,"description":"चार प्रेम कविता | मधुसुदन आनंदयह जो तुम्हारे हमारे बीच हुआऔर जो हो रहा हैऔर जो होता रहेगाउसे कभी भूलकर भीमत कहना प्रेम... यह महाविस्फोट के कोईतेरह अरब सत्तर करोड़ साल बादमलबे के दो छोटे-छोटे टुकड़ों काआपसी आकर्षण हैजिसके लिए सारा यूनिवर्सतमाम आकाशगंगाएँ और सौरमंडलऔर तारे कम पड़ गए सिर्फ पृथ्वी ही बनी वह जगहजो खुद तमाम खिंचावोंऔर बलों के बावजूदहमारे लिए एक रस्सी की तरह तन गई पृथ्वी ने ही किया हमारा कायांतरणएक तरफ से तुमदूसरी तरफ से मैंरस्सी पर चढ़ गए आधी दूरी तक तुमआधी दूरी तक मैंइस रस्सी पर चल कर आते हैंन तुम मेरे बीच सेनिकल पाती हो और ना मैंदोनों एक-दूसरे को छू कर वापस लौट आते हैंसिरों पर और फिर चल पड़ते हैंयह सिर्फ एक यात्रा है आधी-अधूरी प्रेम होता तो मैं तुम में मिल जाताया तुम मुझसेऔर इस तरहकोई तो एक सिरे सेदूसरे सिरे तक पहुँच जाता।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}