{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Meri Khata | Amrita Pritam ","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/5efa6094\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":140,"description":"मेरी ख़ता । अमृता प्रीतमअनुवाद : अमिया कुँवरजाने किन रास्तों से होतीऔर कब की चलीमैं उन रास्तों पर पहुँचीजहाँ फूलों लदे पेड़ थेऔर इतनी महक थी—कि साँसों से भी महक आती थीअचानक दरख़्तों के दरमियानएक सरोवर देखाजिसका नीला और शफ़्फ़ाफ़ पानीदूर तक दिखता था—मैं किनारे पर खड़ी थी तो दिल कियासरोवर में नहा लूँमन भर कर नहाईऔर किनारे पर खड़ीजिस्म सुखा रही थीकि एक आसमानी आवाज़ आईयह शिव जी का सरोवर है...सिर से पाँव तक एक कँपकँपी आईहाय अल्लाह! यह तो मेरी ख़तामेरा गुनाह—कि मैं शिव के सरोवर में नहाईयह तो शिव का आरक्षित सरोवर हैसिर्फ़... उनके लिएऔर फिर वही आवाज़ थीकहने लगी—कि पाप-पुण्य तो बहुत पीछे रह गएतुम बहूत दूर पहुँचकर आई होएक ठौर बँधी और देखाकिरनों ने एक झुरमुट-सा डालाऔर सरोवर का पानी झिलमिलायालगा—जैसे मेरी ख़ता परशिव जी मुस्करा रहे...","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}