{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"My Parikrama- Mantras and Chants","title":"कालनाथाष्टकम् | Kalanatha Ashtakam | स्कन्दप्रोक्तं कालभैरव स्तोत्र | Kashi Kaal Bhairav","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/5fa03f36\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":313,"description":"स्कन्दप्रोक्तं कालनाथाष्टकम्, जो शिवरहस्य के महादेवाख्य, एकादशमांश, अध्याय २६ में वर्णित है। इस स्तोत्र में भगवान श्री कालभैरव के दिव्य, उग्र, रक्षक और शिवस्वरूप का भक्तिपूर्वक ध्यान एवं स्तवन किया गया है।\nइस पाठ में भगवान कालभैरव को कपालमालिकाकण्ठ, ज्वलत्पावकलोचन, महाशूलधारी, दिगम्बर, चन्द्रजटाधारी, शिवाज्ञाकारक और काशी में निर्भयता प्रदान करने वाले दिव्य स्वरूप के रूप में स्मरण किया गया है।\n🌺 कालनाथाष्टकम् की विशेषता\nइस स्तोत्र के श्लोकों में कालभैरव के विभिन्न दिव्य स्वरूपों का ध्यान किया गया है:\n🔸 कपालमालिकाकण्ठम् — कपालों की माला धारण करने वाले\n🔸 ज्वलत्पावकलोचनम् — अग्नि के समान तेजस्वी नेत्रों वाले\n🔸 महाशूलकराम्बुजम् — हाथ में महान त्रिशूल धारण करने वाले\n🔸 दिगम्बरम् — दिगम्बर स्वरूप वाले\n🔸 चारुचन्द्रजटाजूटम् — जटाओं में चन्द्रमा धारण करने वाले\n🔸 बालभानुप्रभाकारम् — उगते सूर्य के समान प्रकाशमान\n🔸 शिवाज्ञाकारकम् — भगवान शिव की आज्ञा का पालन करने वाले\n🔸 काशी में निर्भयता प्रदान करने वाले — काशी की पवित्र परंपरा में कालभैरव के विशेष महत्त्व का स्मरण","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/mnpxxqh9sq7Evcdq5n5sx-MD6z4QLqdOtqbihOjcBJY/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9hNGI2/OWFjODdmOTdkMWIx/MmZiMTFlMGEyNTIz/OWExNi5wbmc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}