{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Beghar Log | Jaiprakash Kardam","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/6055ee68\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":134,"description":"बेघर लोग - जयप्रकाश कर्दम उनको भी प्यारी हैअपनी और अपने परिवारों की ज़िंदगीकरना चाहते हैं वे भीसरकार के सभी आदेशों, निर्देशों का पालनअपनी ज़िंदगी की सुरक्षा के लिएरहना चाहते हैं अपनेघरों के अंदरइसलिए निकल रहे हैं वेअपने दड़बों से बाहरलौट रहे हैं अपनेगाँव-घरों की ओरफटे हाल, नंगे पाँवभूख और थकान की मार झेलतेसिर पर सामान की पोटली मेंअपना घर उठाएसाइकिल पररिक्शा-ठेले में लादकर याहाथों से छोटे बच्चों के हाथ पकड़करपैदल हीउन्हें अपने साथ घसीटते हुएवृद्धों और बीमारों कोपीठ और कंधों पर लादेमृत बच्चों को गोद में उठाएकोरोना के ख़तरे कासामना करते हुएआँखों में कोरोना से भी अधिकआने वाले कल कीभूख का भय लिएगिरते, पड़ते, ठोकरें खातेऊपर सेपुलिस की लाठी और गालियों काप्रसाद पाते हुएतमाम दुःख और यातनाएँसहते हुए भीतय कर रहे हैं वेसैंकड़ों-हज़ारों किलोमीटर की दूरीअपने घर पहुँचने की जल्दी मेंमहानगरों कोबनाने और बसाने वालेबेघर लोग।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}