{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Gujarat Nahin Tumhara Zila | Shashwat Upadhyay","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/62b64d9f\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":158,"description":"गुजरात नहीं तुम्हारा जिला | शाश्वत उपाध्याय\n\nदो अलग दुनिया के बीच\nखटकती- झमकती (लगभग) उपस्थिति \nकवि की तरफ से\nकभी “वारी जावां” की लड़ाई लड़ती है\nकभी ‘हासिल’ का चोंगा ओढ़ कर खुद पर इठलाने का बहाना ढूंढ़ती है\n\nनशा और नशेमन को दोष देने\nबढ़ते ही हैं पांव\nकि चुप-चाप ‘जो हो रहा है, होने दो’ के भाव से \nबीयर की घूंट के साथ पानी हुई जाती है हैसियत।\n\nपुल गिरने से लेकर \nसरकार गिरने तक\nउसी शहर में माला-फूल-बलात्कार\nउसी शहर में बिलकिस का तन\nउसी शहर में हाथ हिलाते जनप्रतिनिधि\n\nउसी शहर का मॉडल \nजिसके छद्म में रचे बसे गए तुम, तुम्हारा बेटा, मेरा भी बेटा\n\nएक मिनट\nउसी शहर से तुम्हारा मतलब गुजरात से तो नहीं\nन दोस्त\nदिल्ली से दरभंगा\nऔर सीकर से झुनझुनु \nऔर खीरी से मुजफ्फरनगर\nबलिया-बांका-बुलंदशहर और जोड़ो\n\nउसी शहर का मतलब तुम्हारा देस है।\nदेस,\nताल्वय श नहीं दंत्य स\n\nयहां श शुद्धता के मानक को पार कर गया है \n\nलोक के लिए ललायित कवि,\nदेश से देस तक की दूरी \nउस शहर ने बुलेट रेल की गति से नाप ली है।\nतुम्हारा जिला भी तैयार बैठा है। \n\nअब,\nदो अलग दुनिया के बीच \nझमकती- खटकती उपस्थिति लिए\nबीयर की घूंट के साथ ‘जो हो रहा होने दो’ के भाव से\nचाहो तो पानी हो जाओ\nचाहो तो कवि।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}