{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Parinde Par Kavi Ko Pehchante Hain | Rajesh Joshi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/691401a4\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":218,"description":"परिन्दे पर कवि को पहचानते हैं - राजेश जोशी \n\nसालिम अली की क़िताबें पढ़ते हुए\nमैंने परिन्दों को पहचानना सीखा।\nऔर उनका पीछा करने लगा\nपाँव में जंज़ीर न होती तो अब तक तो .\nन जाने कहाँ का कहाँ निकल गया होता\nहो सकता था पीछा करते-करते मेरे पंख उग आते\nऔर मैं उड़ना भी सीख जाता\nजब परिन्दे गाना शुरू करतें\nऔर पहाड़ अँधेरे में डूब जाते।\nट्रक ड्राइवर रात की लम्बाई नापने निकलते\nतो अक्सर मुझे साथ ले लेते\nमैं परिन्दों के बारे में कई कहानियाँ जानता था\nमुझे किसी ने बताया था कि जिनके पास पंख नहीं होते\nऔर जिन्हें उड़ना नहीं आता\nवे मन-ही-मन सबसे लम्बी उड़ान भरते हैं\nइसलिए रास्तों में जो जान-पहचानवाले लोग मिलते\nमुझसे हमेशा परिन्दों की कहानियाँ सुनाने को कहते\nदोस्त जब पूछते थे तो मैं अक्सर कहता था\nमुझे चिट्ठी मत लिखना\nपरिन्दों का पीछे करनेवाले का\nकोई स्थायी पता नहीं होता\nमुझे क्या ख़बर थी कि एक दिन ऐसा आएगा\nजब चिट्ठी लिखने का चलन ही अतीत हो जाएगा\nन जाने किन कहानियों से उड़ान भरते\nकुछ अजीब-से परिन्दे हमारे पास आते थे\nजो गाते-गाते एक लपट में बदल जाते\nऔर देखते-देखते राख हो जाते\nपर एक दिन बरसात आती\nऔर वे अपनी ही राख से फिर पैदा हो जाते\nपता नहीं हमारे आकाश में उड़नेवाले परिन्दे \nकहानियों से निकलकर आए परिन्दों के बारे में\nकुछ जानते थे या नहीं...\nउनकी आँख देखकर लेकिन लगता था\nकि उन कवियों को परिन्दे पर जानते हैं\nजो क़ुक़्नुस जैसे हज़ारों काल्पनिक परिन्दों की -\nकहानियाँ बनाते हैं ।\nपाँव में ज़ंजीर न होती तो शायद\nएक न एक दिन मैं भी किसी कवि के हत्थे चढ़कर\nऐसे ही किसी परिन्दे में बदल गया होता!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}