{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Gaon Gaya Tha, Gaon Se Bhaaga | Kailash Gautam","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/72febd62\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":202,"description":"गाँव गया था, गाँव से भागा | कैलाश गौतम गाँव गया थागाँव से भागा।रामराज का हाल देखकरपंचायत की चाल देखकरआँगन में दीवाल देखकरसिर पर आती डाल देखकरनदी का पानी लाल देखकरऔर आँख में बाल देखकरगाँव गया थागाँव से भागा।गाँव गया थागाँव से भागा।सरकारी स्कीम देखकरबालू में से क्रीम देखकरदेह बनाती टीम देखकरहवा में उड़ता भीम देखकरसौ-सौ नीम हकीम देखकरगिरवी राम-रहीम देखकरगाँव गया थागाँव से भागा।गाँव गया थागाँव से भागा।जला हुआ खलिहान देखकरनेता का दालान देखकरमुस्काता शैतान देखकरघिघियाता इंसान देखकरकहीं नहीं ईमान देखकरबोझ हुआ मेहमान देखकरगाँव गया थागाँव से भागा।गाँव गया थागाँव से भागा।नए धनी का रंग देखकररंग हुआ बदरंग देखकरबातचीत का ढंग देखकरकुएँ-कुएँ में भंग देखकरझूठी शान उमंग देखकरपुलिस, चोर के संग देखकरगाँव गया थागाँव से भागा।गाँव गया थागाँव से भागा।बिना टिकट बारात देखकरटाट देखकर भात देखकरवही ढाक के पात देखकरपोखर में नवजात देखकरपड़ी पेट पर लात देखकरमैं अपनी औक़ात देखकरगाँव गया थागाँव से भागा।गाँव गया थागाँव से भागा।नए-नए हथियार देखकरलहू-लहू त्योहार देखकरझूठ की जै-जैकार देखकरसच पर पड़ती मार देखकरभगतिन का शृंगार देखकरगिरी व्यास की लार देखकरगाँव गया थागाँव से भागा।गाँव गया थागाँव से भागा।मुठ्ठी में क़ानून देखकरकिचकिच दोनों जून देखकरसिर पर चढ़ा जुनून देखकरगंजे को नाख़ून देखकरउज़बक अफ़लातून देखकरपंडित का सैलून देखकरगाँव गया थागाँव से भागा।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}