{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Apne Aap Se | Zaahid Dar","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/732ebd22\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":177,"description":"अपने आप से | ज़ाहिद डार\nमैं ने लोगों से भला क्या सीखा\nयही अल्फ़ाज़ में झूटी सच्ची\nबात से बात मिलाना दिल की\nबे-यक़ीनी को छुपाना सर को\nहर ग़बी कुंद-ज़ेहन शख़्स की ख़िदमत में झुकाना हँसना\nमुस्कुराते हुए कहना साहब\nज़िंदगी करने का फ़न आप से बेहतर तो यहाँ कोई नहीं जानता है\nगुफ़्तुगू कितनी भी मजहूल हो माथा हमवार\nकान बेदार रहें आँखें निहायत गहरी\nसोच में डूबी हुई\nफ़लसफ़ी ऐसे किताबी या ज़बानी मानो\nउस से पहले कभी इंसान ने देखे ने सुने\nउन को बतला दो यही बात वगर्ना इक दिन\nऔर वो दिन भी बहुत दूर नहीं\nतुम नहीं आओगे ये लोग कहेंगे जाहिल\nबात करने का सलीक़ा ही नहीं जानता है\nक्या तुम्हें ख़ौफ़ नहीं आता है\nख़ौफ़ आता है कि लोगों की नज़र से गिर कर\nहाज़रा दौर में इक शख़्स जिए तो कैसे\nशहर में लाखों की आबादी में\nएक भी ऐसा नहीं\nजिस का ईमान किसी ऐसे वजूद\nऐसी हस्ती या हक़ीक़त या हिकायत पर हो\nजिस तक\nहाज़रा दौर के जिब्रईल की (या'नी अख़बार)\nदस्तरस न हो रसाई न हो\nमैं ने लोगों से भला क्या सीखा\nबुज़दिली और जहालत की फ़ज़ा में जीना\nदाइमी ख़ौफ़ में रहना कहना\nसब बराबर हैं हुजूम\nजिस तरफ़ जाए वही रस्ता है\nमैं ने लोगों से भला क्या सीखा\nबे यक़ीनी- अविश्वास\nग़बी- मंदबुद्धि\nकुंद ज़ह्न- मूर्ख\nख़िदमत- सेवा\nगुफ़्तगू: बात चीत\nमजहूल- मूर्खता से भरी हुई\nहमवार: एक सा\nबेदार: जागता हुआ\n  फ़ल्सफ़ी दार्शनिक\nहाज़रा: वर्तमान\nहस्ती: अस्तित्व\nहिकायत: कहानी\nजिब्रईल: मान्यता के अनुसार ख़ुदा का एक फ़रिश्ता\nदस्तरस: पहुँच\nरसाई: पहुँच\nदाइमी: शाश्वत\nहुजूम: भीड़","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}