{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Manikarnika Ka Bashinda | Gyanendrapati","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/76d2e0d7\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":232,"description":"मणिकर्णिका का बाशिंदा | ज्ञानेन्द्रपति \n\nसाढ़े तीन टाँगों वाला एक कुत्ता\nमणिकर्णिका का स्थायी बाशिंदा है\nलकड़ी की टालों और चायथानों वालों से हिलगा\nयह नहीं कि दुत्कारा नहीं जाता वह\nलेकिन हमेशा दूर-दूर रखने वाली दुर-दुर\nनहीं भुगतता वह यहाँ \nविकलांगता के बावजूद विकल नहीं रहता यहाँ\nसाढ़े तीन टाँगों वाला वह भूरा कुत्ता\nतनिक उदास ऑँखों से मानुष मन को थाहता-सा\nइधर से उधर आता-जाता है\nबीच-बीच में यहाँ-वहाँ मिल जाता है\nअपनी दयनीयता में\nअपने इलाके में होने की अकड़ छुपाये\nकाठ का भरम देती, कंक्रीट की बनी\nदो बेंचों पर\nहम बैठे हैं।\nशवसंगी आज, मणिकर्णिका पर\nउधर चिताग्नि ने लहक पा ली है।\nहाल की बनी हैं\nये बेंचें, नगर निगम ने लगवाईं\n'सुविधाओं में इज़ाफ़ा' जिसे कहा जा रहा है\nदिनोदिन कठिन होते जा रहे जिस नगर में \nदेवों को भी तंगी में काम चलाना पड़ रहा है\nजहाँ\nमहादेव के नगर में\nएक टूटी छूटी साँसों वाले के संग\nअपनी साँसें जोड़ते यहाँ तक आने वालों के लिए\nथकी देह ढीलने लायक ज़रा-सा इत्मीनान जहाँ\nहालांकि पूरे ध्यान से कान लगाने पर भी\nसुनायी नहीं पड़ता तारक मन्त्र का एक भी अक्षर\nमुक्तिकामी शव के कानों में जिसे\nशिव फुसफुसाते हैं\nकि तभी, ध्यान बँटाता\nएक बार फिर\nगुज़रता है साढ़े तीन टाँगों वाला\nमणिकर्णिका का स्थायी बाशिंदा वह कुत्ता \nअपनी फुदक में हवा में झूलती अधकटी टाँग से निरक्षर फुसफुसाता\nसा :\n मुझसे पूछो, ज़िंदगी की बेअन्त जंगमता में मृत्यु अल्पविराम है सिर्फ़\nउसकी लपलपाती जीभ हाँफती होती है दरअसल\nमहाजीवन के गति-चक्र में  सब बँधे हैं -शिव हों कि श्वान","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}