{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ujda Mera Gaon | Rita Shukla","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/788c7b4d\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":235,"description":"उजड़ा मेरा गाँव। ऋता शुक्लआम नीम महुआ की छायानंदन कानन गाँव हमाराकाशी मथुरा वृन्दावन गंगासागर से अधिक दुलारा चैता फगुआ ढोल झाल से मह मह करती थीं चौपालें कजरी सोहर बारहमासाअंगनाई की गमक संभाले गंगा मईया की गोदी लहरों संग वह डोला पाँतीनिर्गुण की लय साँझ उदासीआजी करती दीया बातीपहली पूजा काली मईयाखीर बताशा भोग लगातीगाँव की उसकी रक्षा करना भोले बाबा से यह विनतीकाम रसोई फिर जब जातीघर-घर अगिल बिताई जातीबालक बूढ़े सब होते पितफिर आती गृहणी की बारीपिछवाड़े की नीम दार से कोयल आती भद बतियाती और सुनहरी पाँखो वाली महुआ शुभ संदेशा लातीहल बैलों की जोड़ी सजतीबद्री काका तड़के उठके भोर भई उठ जाग मुसाफ़िरसुरती मलते हाथ लगाते रामू कर्मा धर्मा मिल कर गेंहूँ चना गवार उगाते अरहर सरसो मड़ुआ मकई फ़सल काटते परब मनाते हँसी ख़ुशी दिन पूरा होता साँझ रात को गले लगाती रामायण की बैठन खुलती ओसारे पर भीड़ उमड़तीदरी बिछाओ रेहन लाओ धूप-दीप से पोथी पूजन तुलसी के दोहे चौपाईराम कथा अनुपम मनभावन सिया राम मय सब जग जाने तान उठाते गिरिधर काका कुबलय बिपिन कुंत बन सरिसा। बारिद तपत तेल जनु बरिसा॥जनक दुलारी के वियोग में वन-वन भटके श्री रघुनन्दन अम्मा की बिछोह में बाबू जी का वह बौराया सा मन गौरैया सा तिनका-तिनका आस जगाती छोटी बहिना बड़की दिदिया को संग लेकर कब लौटेंगे मेरे पहुना दीपू मुन्नू पढ़ने जाते रतनारी अंखियों में काजल कभी कुदीठ न लगने पाएये बालक ही माँओं का धन बेंत सूतते पंडित जी की आँख बचा कर दौड़ लगाते खेल कबड्डी कुश्ती जमती लोट-पोट हो जाती माटी","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}