{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Samay Aur Bachpan | Hemant Deolekar","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/79d28b6c\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":146,"description":"समय और बचपन - हेमंत देवलेकर उसने मेरी कलाई परटिक टिक करती घड़ी देखीतो मचल उठी वैसी ही घड़ी पाने के लिएउसका जी बहलातेस्थिर समय की एक खिलौना घड़ीबाँध दी उसकी नन्हीं कलाई परपर घड़ी का खिलौनामंज़ूर  नहीं था उसेटिक टिक बोलती, समय बतातीघड़ी असली मचल रही थी उसके हठ मेंयह सच है कि बच्चे समय का स्वप्न देखते हैंलेकिन मैं उसे समय के हाथों में कैसे सौंप दूँक्योंकि वह एक कुख्यात बच्चा चोर हैतभी उसकी ज़िद ने मेरी कलाई पकड़ लीबच्ची की आँखों में जीवन की सबसे चमकदार चीज़ देखीः कौतुहलऔर मेरे पास क्या था? खुरदुरा, घिसा-पिटाः अनुभवजो मुझे डराता ज़्यादा था ऐसा अनुभव किस काम का जो बच्चों का कौतुहल ही नष्ट कर देहो सकता है बच्चों की संगत सेसमय बदल जाएमैंने टिक टिक करती असली घड़ीबच्ची की कलाई पर बाँध दीऔर समय उसके हवाले कर दिया।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}