{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Atmahatya | Shashwat Upadhyay","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/7df02f8b\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":198,"description":"आत्महत्या | शाश्वत उपाध्याय\n\nसात आसमानों के पार आठवें आसमान पर \nजहाँ आकर चाँद रुक जाता है \nसूरज की रौशनी पर टूटे सपनों के किरचें चमकते हैं \nदिन और रात की परिभाषायें रद्द हो जाती हैं\nकि आत्महत्या\nऊपर उठती दुनिया की सबसे आखिरी मंज़िल है \nप्यार के भी बाद किया जाने वाला सबसे तिलिस्मी काम। \nकोई है\nजिसके पास काफी कुछ है \nसुबह है उम्मीद से जगमगाई हुई \nशाम है चाँदनी की परत लिए हुए \nवह खुद है मैं से हम होकर नूर बरसाता ख़ल्क़ पर \nऔर फिर,\nजब उसकी उम्मीद से जगर मगर सुबह को खींच कर \nउसके शाम के चाँदनी के परत को उतार कर \nउसके मैं से हम हुये अस्तित्व को निधार कर \nकोई और\nअपनी सुबह शाम और खुद को रचता है \nतो जानिए\nप्यार के भी बाद किया जाने वाला सबसे तिलिस्मी काम है\nआत्महत्या\nमेरे दोस्त बेशक आपने प्यार किया होगा\nऔर प्यार के गहनतम क्षण के बाद आप मृतप्राय हुए होंगे\nलगा होगा \nयही तो जीवन है, \nकि जीवन और मृत्यु के इतने करीब जाकर भी आप मरे नही \nक्योंकि मरना सबके बस की बात नही \nयह गले में सुई चुभा कर थूक के साथ \nक्रोध घोंटने की तमीज़ है \nयह प्यार से भी आगे की चीज़ है\nमुझे कुछ आत्महंताओ का पता चाहिए \nमैं उनसे मिलना चाहता हूँ \nशायद उन्हें जोड़कर कोई कविता बनाऊँ \nया फिर \nआत्महत्या की भूमिका \nनहीं-नहीं \nमैं उनके मरने के ठीक पहले की बात जानना चाहता हूँ \nयह भी जानना है कि इरादों की यह पेंग \nकहाँ से भरी थी तुमने\nक्या किसी बदबूदार सफेदपोश की कार का धुंआँ \nतुम्हारे सपनों पर पेशाब कर गया था \nऔर तुम कुछ नही कर सकते थे\nक्या तुम्हें ऐसा लग रहा था कि \nगाँव के खेतों में खुल रही फैक्टरी का काला पानी \nतुम्हारे बेटे की आँतें निचोड़ लेगा \nऔर तुम कुछ नहीं कर सकते\nया ऐसा की तुम्हारी बन्द हुई फेलोशिप \nकिसी सूट में सोने के तारों से नाम लिखवाने की बजबजाती सोच है \nऔर तुम कुछ नहीं कर सकते?\nमैं कुछ आत्महंताओ से मिलना चाहता हूँ \nआप मेरे भीतर का शोर दबा दें \nआप मेरी सारी कविताएँ फूँक दें \nया मुझसे स्तुति गान ही लिखवा लें \nमगर मुझे उन आत्महंताओ का पता दे दें \nजिनके पास प्यार करने का भी विकल्प था और उन्होंने नहीं चुना\nवह तो चढ़ गये उस आखिरी मंज़िल \nजहाँ चाँद रुक जाता है, \nसूरज की रौशनी पर टूटे सपनों के किरचें चमकते हैं \nदिन और रात की परिभाषाएँ रद्द हो जाती हैं \nऔर रची जाती है \nप्यार के भी बाद के तिलिस्म की भूमिका \nसात...","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}