{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Bas Ek Vachan | Mridula Shukla","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/8008ef64\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":138,"description":"बस एक वचन।  मृदुला शुक्लाजब तुम मुझसे कर रहे थे प्रणय निवेदनतुम्हारी गर्म हथेलियों के बीचकंपकंपा रहा था मेरा दायाँ हाथउसी वक़्त, तुम्हारे कमरे की दीवार परमेरे सामने टंगी थी एक तस्वीरजिसमे एक जवान औरत पीस रही थी चक्कीऔर बूढ़ी औरत दे रही थी चक्की के बीच दानेपास ही आधा पड़ा खाली मटकाउन्हें उनकी अगली लड़ाई की याद दिला रहा थाउसी तस्वीर में एक जवान आदमी दीवार से सर टिकागुडगुडा रहा था हुक्काएक बूढा वही बैठा बजा रहा था सारंगीमुझे स्वीकार है तुम्हारा प्रणय निवेदनबिना सात फेरों के बिना सातों वचन के!बस एक वचन किजब मेरा बेटा कर रहा हो प्रणय निवेदन अपनी सहचरी सेतो उसके पीछे दीवार पर टंगी तस्वीर मेंबूढ़ी औरत बजा रही हो सारंगीबूढ़ा गुडगुडा रहा हो हुक्काऔर जवान औरत और आदमीमिल कर चला रहा हो चक्कीसुनो ! क्या तुम मेरे लिए,बदल सकते हो दीवार पर टंगी इस तस्वीर के पात्रों की जगह भी?","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}