{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Main Jhukta Hun - Rajesh Joshi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/82c56dd5\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":157,"description":"मैं झुकता हूँ - राजेश जोशीराजेश जोशी साहित्य अकादमी पुरस्कृत कवि और साहित्यकार हैं। उनका जन्म 18 जुलाई 1946 को नरसिंहगढ़, मध्य प्रदेश में हुआ। प्रमुख कृतियों के लिए उन्हें शिखर सम्मान, पहल सम्मान, कैफ़ी आजमी सम्मान, शशि भूषण स्मृति नाट्य सम्मान आदि कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। दरवाज़े से बाहर जाने से पहलेअपने जूतों के तस्मे बाँधने के लिए मैं झुकता हूँरोटी का कौर तोड़ने और खाने के लिएझुकता हूँ अपनी थाली परजेब से अचानक गिर गई क़लम या सिक्के को उठाने कोझुकता हूँझुकता हूँ लेकिन उस तरह नहींजैसे एक चापलूस की आत्मा झुकती हैकिसी शक्तिशाली के सामनेजैसे लज्जित या अपमानित होकर झुकती हैं आँखेंझुकता हूँजैसे शब्दों को पढ़ने के लिए आँखें झुकती हैंताक़त और अधीनता की भाषा से बाहर भी होते हैंशब्दों और क्रियाओं के कई अर्थझुकता हूँजैसे घुटना हमेशा पेट की तरफ़ ही मुड़ता हैयह कथन सिर्फ़ शरीर के नैसर्गिक गुणोंया अवगुणों को ही व्यक्त नहीं करताकहावतें अर्थ से ज़्यादा अभिप्राय में निवास करती हैं।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}