{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ishwar Ke Bacche | Alok Azad","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/84a5ef6d\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":125,"description":"ईश्वर के बच्चे | आलोक आज़ाद \n\nक्या आपने\nईश्वर के बच्चों को देखा है?\nये अक्सर\nसीरिया और अफ्रीका के खुले मैदानों में\nधरती से क्षितिज की और\nदौड़ लगा रहे होते हैं\nये अपनी माँ की कोख से ही मज़दूर है।\nऔर अपने पिता के पहले स्पर्श से ही युद्धरत है।\nये किसी चमत्कार की तरह\nयुद्ध में गिराए जा रहे\nखाने के थैलों के पास प्रकट हो जाते हैं।\nऔर किसी चमत्कार की तरह ही अट्श्य हो जाते हैं।\nये संसद और देवताओं के\nसामूहिक मंथन से निकली हुई संताने हैं।\nजो ईश्वर के हवाले कर दी गई हैं।\nईश्वर की संतानों को जब भुख लगती है।\nतो ये आस्था से सर उठा कर\nऊपर आकाश में देखते हैं।\nऔर पश्चिम से आए देव-दूर्तों के हाथों मारे जाते हैं\nईश्वर की संताने\nउसे बहुत प्रिय हैं।\nवो उनकी अस्थियों पर लोकतंत्र के\nनए शिल्प रचता है\nऔर उनके लह से जगमगाते बाज़ारों में रंग भरता है\nमैं अक्सर\nजब पश्चिम की शोख़ चमकती रात को\nऔर उसके उगते सुरज के रंग को देखता हूँ\nमुझे उसका रंग इसानी लहू-सा\nखालिस लाल दिखाई देता है।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}