{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Hajamat | Anup Sethi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/85f1ce2c\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":186,"description":"हजामत | अनूप सेठी \n \nसैलून की कुर्सी पर बैठे हुए\nकान के पीछे उस्तरा चला तो सिहरन हुई\n\nआइने में देखा बाबा ने\nसाठ-पैंसठ साल पहले भी\nकान के पीछे गुदगुदी हुई थी\nपिता ने कंधे से थाम लिया था\n\nआइने में देखा बाबा ने\nपीछे बैंच पर अधेड़ बेटा पत्रिकाएँ पलटता हुआ बैठा है\nचालीस साल पहले यह भी उस्तरे की सरसराहट से बिदका था\n\nबाबा ने देखा आइने में\nइकतालीस साल पहले जब पत्नी को पहली बार\nब्याह के बाद गाँव में घास की गड्डी उठाकर लाते देखा था\nहरी कोमल झालर मुँह को छूकर गुज़री थी\nजैसे नाई ने पानी का फुहारा छोड़ा हो अचानक\n\nतीस साल पहले जब बेटी विदा हुई थी\nउसने कूक मारी थी ज़ोर  से आँखें भर आईं थीं\nऔर नाई ने पौंछ दीं रौंएदार तौलिए से\n\nपाँच साल पहले पत्नी की देह को आग दी\nआँखें सूखी रहीं, गर्दन भीग गई थी\nजैसे बालों के टुकड़े चिपके हुए चुभने लगते हैं\n\nबाबा के हाथ नहीं पँहुचे गर्दन तक आँखों पर या कान के पीछे\nबेटा पत्रिका में खोया हुआ है\nआइने में दुगनी दूर दिखता है\nनाई कम्बख़्त देर बहुत लगाता है\n\nहड़बड़ा कर आख़िरी बार आइने को देखा बाबा ने\nउठते हुए सीढ़ी से उतरते वक़्त बेटे ने कंधे को हौले से थामा\nबाबा ने खुली हवा में साँस ली\nआसमान ज़रा धुंधला था\n\nआइने बड़ा भरमाते हैं\nउस्तरा भी कहाँ से कहाँ चला जाता है\nसाठ पैंसठ साल से हर बार बाबा सोचते हैं\nइस बार दिल जकड़ के जाऊंगा नाई के पास\n\nपाँच के हों या पिचहत्तर बरस के बाबा\nबड़ा दुष्कर है हजामत बनवाना","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}