{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Mithai Banane Wale | Shashwat Upadhyay","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/8f4ebc57\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":168,"description":"मिठाई बनाने वाले | शाश्वत उपाध्याय \n\nजब दुनिया बनी\nतो सबसे पहले बने मिठाई बनाने वाले\nहाथों में भर भर के चीनी की परत\nपरत भी ऐसी वैसी नहीं\nएकदम गूलर का फूल छुआ के\nजितना खर्च हो, उतना बढ़े\nउंगली के पोरों में घी का कनस्तर,\nकनस्तर भी वही गूलर के फूलों वाला\nआँखों में परख,\nपरख भी एकदम पाग चिन्ह लेने वाली\nइतने सब के बाद\nबोली तो मीठी होनी ही थी\nसो भी है।\nलेकिन कलेजा?\nमठूस हलवाई कहीं का,\nबचपन में ही काले रसगुल्ले की कीमत\nआसमान पर रखे था\nसात रुपया पीस\nआते जाते स्कूल,\nमन मार कर साइकिल चलाते लड़कों में,\nनौकरी की पहली ललक तुम्हारे रसगुल्ले के रेट ने ही तो लगाई\nसात रुपया पीस\nरसगुल्ला है कि कलेजे का टुकड़ा तुम्हारे?\nऔर समोसा,\nवह भी हर साल एक रुपये महंगा\nबहाना तो देखो,\nमहंगाई बढ़ रही\nलौंगलत्ता तो ऐसे,\nजैसे सोखा का लौंग डाले हो ओझइती करके\nक्या सोचे हो?\nकि शो-केश के उस पार की सारी मिठाई तुम्हारी बपौती हैं?\nसो तो हैं।\nलेकिन,\nएक दिन जब होंगे लायक\nतो ज़रूर देह में घुल चुकी होगी चीनी की परत।\nजिंदगी उबले हुए आलू को सोख रही होगी।\nऔर ज़बान में लड़खड़ाहट भी होगी।\nफिर भी,\nकिसी दिन आ कर\nतुम्हारी दुकान की सारी मिठाई खा जाएंगे\nफिर देह में घुल चुकी शर्करा के पार जा कर\nभगवान से आश्वासन लेंगे\nकि\nअगली बार\nलड़की बनाना\nजिसके पिता और पति दोनों की\nअपनी मिठाई की दुकान हो।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}