{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Ve Log | Lakshmi Shankar Vajpeyi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/92406b2b\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":142,"description":"वे लोग | लक्ष्मी शंकर वाजपेयीवे लोगडिबिया में भरकर पिसी हुई चीनीतलाशते थे चींटियों के ठिकानेछतों पर बिखेरते थे बाजरा के दानेकि आकर चुगें चिड़ियाँवे घर के बाहर बनवाते थेपानी की हौदीकि आते जाते प्यासे जानवरपी सकें पानीभोजन प्रारंभ करने से पूर्ववे निकालते थे गाय तथा अन्य प्राणियों का हिस्सासूर्यास्त के बाद, वे नहीं तोड़ने देते थेपेड़ से एक पत्तीकि ख़लल न पड़ जाएसोये हुए पेड़ों की नींद मेंवे अपनी तरफ़ से शुरु कर देते थे बातअजनबी से पूछ लेते थे उसका परिचयज़रूरतमंदों की करते थेदिल खोल कर मददकोई पूछे किसी का मकानतो ख़ुद छोड़ कर आते थे उस मकान तककोई भूला भटका अनजान मुसाफ़िरआ जाए रात बिराततो करते थे भोजन और विश्राम की व्यवस्थासंभव है, अभी भी दूरदराज़ किसी गाँव या क़स्बे मेंबचे हों उनकी प्रजाति के कुछ लोगकाश ऐसे लोगों काबनवाया जा सकता एक म्युज़ियमताकि आने वाली पीढ़ियों के लोगजान सकतेकि जीने का एक अंदाज़ ये भी था।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}