{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Jagah Ke Paas | Prakash Sahu","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/983ca277\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":131,"description":"जगह के पास | प्रकाश साहूघर का एक कोना होता हैजहाँ कुछ तस्वीरें होती है माने गए ईश्वर कीया बीते हुए मनुष्य कीउसके आसपास कुछ छोटे बड़े रहस्य खुलते रहते हैंवह कोना कभी चौंकता नहींउसी तरह के रहस्यशराबखाने , अस्पताल और घनिष्ट मित्रके पास भी खुलते हैंये जगहें कभी चौंकतीं नहींगुस्सा नहीं दिखातीअपना लेती है हर बात को (तथ्यों की तरह)साहस देती है अपनाने काबालों में उँगलियाँ फिराकर सुलाती हैयह ध्यान रखते हुएकि उसकी उँगलियाँ बालों में फंसे नहींसदा के लिएसोने के बीच में वह रहस्य में से परेशानी का गट्ठर लेकरउन्हें हल करती हैउनके लिए जीने का एक नुक्ता बनाकरहाथ में धरा देती हैअगली सुबह जब उठते हैंहम समझदार हो चुके होते हैंचले जाते हैंनये रहस्य के साथ फिर लौटनेजगह के पास","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}