{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Tumhari Jeb Mein Ek Suraj Hota Tha | Ajay","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/98e82df6\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":162,"description":"तुम्हारी जेब में एक सूरज होता था । अजेय\n\nतुम्हारी जेबों में टटोलने हैं मुझे\n\nदुनिया के तमाम ख़ज़ाने\nसूखी हुई ख़ुबानियाँ\n\nभुने हुए जौ के दाने\nकाठ की एक चपटी कंघी और सीप की फुलियाँ\n\nसूँघ सकता हूँ गंध एक सस्ते साबुन की\nआज भी\n\nमैं तुम्हारी छाती से चिपका\nतुम्हारी देह को तापता एक छोटा बच्चा हूँ माँ\n\nमुझे जल्दी से बड़ा हो जाने दे\nमुझे कहना है धन्यवाद\n\nएक दुबली लड़की की कातर आँखों को\nमूँगफलियाँ छीलती गिलहरी की\n\nनन्ही पिलपिली उँगलियों को\nदो-दो हाथ करने हैं मुझे\n\nनदी की एक वनैली लहर से\nआँख से आँख मिलानी  है\n\nहवा के एक शैतान झोंके से\nमुझे तुम्हारी सबसे भीतर वाली जेब से\n\nचुराना है एक दहकता सूरज\nऔर भाग कर गुम हो जाना है\n\nतुम्हारी अँधेरी दुनिया में एक फ़रिश्ते की तरह\nजहाँ औंधे मुँह बेसुध पड़ी हैं\n\nतुम्हारी अनगिनत सखियाँ\nमेरे बेशुमार दोस्त खड़े हैं हाथ फैलाए\n\nकोई ख़बर नहीं जिनको\nकि कौन-सा पहर अभी चल रहा है\n\nऔर कौन गुज़र गया है अभी-अभी\nसौंपना है माँ\n\nउन्हें उनका अपना सपना\nलौटाना है उन्हें उनकी गुलाबी अमानत\n\nसहेज कर रखा हुआ है\nजो तुमने बड़ी हिफ़ाज़त से\n\nअपनी सबसे भीतर वाली जेब में!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}