{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Kuch Sacchaiyaan Kuch Jhooth | Wazda Khan","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/9a087a9d\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":148,"description":"कुछ सच्चाईयां, कुछ झूठ ।  वाज़दा खान  केवल मिसाइलें ही गहरेमारक असर नहीं करतींजीवन में और भी बहुत कुछ है गहरा और असरदार\nकभी उतरो जो उन गहराइयों मेंजहां बेहद अन्धेरा हैकहीं है चिड़िया की एक आवाज़कहीं चट्टानों के बीच दबा कोई रंगकहीं दरारों में बिंधा रुदन\nनिश्चित रूप से हर असरगहरा अन्धेरा नहीं होतामगर जो गहरा और असरदार है उनमें सेकुछ सितारों के साथ, तो कुछदूसरे ग्रह के सूर्य के साथछप जाते हैं पानी से लेकरउन हवाओं तक\nजो पिछली सदी और उससे भीपिछली सदी में और आज तक एकजैसी है, पानी भी एक जैसा हैमगर कुछ है जो बदलता जा रहा हैतेज़ी से वक्त के साथ \nदेख पाती हूं आंखों के भीतरचमकती धूप में पाती हूं तबकुछ सच्चाइयां, कुछ झूठ, कुछ गणनायेंकुछ तथ्य, बहुत सारी चुप्पियांऔर तबाह कर देने वालाइक स्याह जुनून।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}