{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Aparichit Se Prem | Mamta Kalia","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/9b924d33\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":193,"description":"अपरिचित से प्रेम | ममता कालियासबसे पहले तो बताओ अपना नामफिर मोहल्ला, कहाँ रहते तो, क्या करते होरोज़ सवेरे इकत्तीस नबंर की बस सेकहाँ जाते होऔर अक्सर चाय कीउस रद्दी-सी दुकान परक्यों खड़े रहते होतुम्हारे बारे मेंबहुत कुछ जानने की इच्छा हैतुम्हें शहर की कौन-सी सड़कें पसंद हैंक्या वो जो अक्सर वीरान रहती हैंया वो जहाँ भीड़-भाड़ रहती हैतुम कौन-सा अख़बार पढ़ते होकौन-सी पत्रिकाएँखाली समय में क्या पसंद करते होसोना, उदास रहना या ठहाके लगानातुम कौन-सी सिगरेट पीते होकिस साबुन से नहाते होअपने बाल इतने अस्त-व्यस्त और रूखे क्यों रखते होजानबूझकर रखते होया तुमसे सँभलते नहींतुम्हें कौन-सा नेता पसंद हैऔर कौन-सा अभिनेताअभिनेत्रियों के बारे में तुम्हारी क्या राय हैबोर दूर्दरशन से बचने का तुम्हारे पास क्या उपाय हैप्रेमचंद के अलावा कौन रचनाकार तुम्हें अच्छा लगता हैक्या तुम्हें ऐसा नहीं लगतासमकालीन लेखन मेंबेहद एक रास्ता हैइसके अलावा तुम्हारे बारे मेंकितना कुछ जानना चाहती हूँअभी तुम मेरे लिए मात्र जिज्ञासा होआकंठ जिज्ञासा!फिर तुम आश्चर्य में बदल जाओगेसातवाँ, आठवाँ या दसवाँ नहींमेरे लिए मेरा पहला पावन आश्चर्यन जाने क्यों मुझे लगता हैतुम्हारी और मेरी रुचियाँ ज़रूर मिलती होंगीतुम्हें भी, आपसी ताल्लुक मेंबहुत जल्द खरोंच लगती होगीतुम्हें भी छोटी-छोटी बातेंबे-वजह ख़ुशी देती होंगीऔर उससे भी छोटी-छोटी बातों परतुम तुनक जाते होगेतुम भी अकेले में अपने से खूब बोलते होगेलेकिन भीड़-भाड़ में बाहर का रास्ता टटोलते होगेपता नहीं क्यों मुझे लगता हैतुम मेरे अनुमानों से भी ज़्यादाअच्छे हो!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}