{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Raat Kisi Ka Ghar Nahi | Rajesh Joshi","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/a03c35e0\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":256,"description":"रात किसी का घर नहीं | राजेश जोशी\n\nरात गए सड़कों पर अक्सर एक न एक आदमी ऐसा ज़रूर मिल जाता है\nजो अपने घर का रास्ता भूल गया होता है\n\nकभी-कभी कोई ऐसा भी होता है जो घर का रास्ता तो जानता है\nपर अपने घर जाना नहीं चाहता\n\nएक बूढ़ा मुझे अक्सर रास्ते में मिल जाता है\nकहता है कि उसके लड़कों ने उसे घर से निकाल दिया है।\n\nकि उसने पिछले तीन दिन से कुछ नहीं खाया है।\nलड़कों के बारे में बताते हुए वह अक्सर रुआँसा हो जाता है\n\nऔर अपनी फटी हुई क़मीज़ को उघाड़कर\nमार के निशान दिखाने लगता है\n\nकहता है उसने बचपन में भी अपने बच्चों पर\nकभी हाथ नहीं उठाया\n\nलेकिन उसके बच्चे उसे हर दिन पीटते हैं\nकहता है कि वह अब कभी लौटकर\n\nअपने घर नहीं जाएगा\nलेकिन थोड़ी देर बाद ही उसे लगता है कि उसने यूँ ही\n\nग़ुस्से में बोल दिया था यह वाक़्य\nअपमान पर हावी होने लगती एक अनिश्चितता\n\nएक भय अचानक घिरने लगता है मन में\nथोड़ी देर बाद वह अपने आप से ही हार जाता है\n\nदूसरे ही पल वह कहता है\nकि अब इस उम्र में वह कहाँ जा सकता है\n\nवह चाहता है, मैं उसके लड़कों को जाकर समझाऊँ\nकि लड़के उसे वापस घर में आ जाने दें\n\nकि वह चुपचाप एक कोने में पड़ा रहेगा\nकि वह बाज़ार के छोटे-मोटे काम भी कर दिया करेगा\n\nबच्चों को स्कूल से लाने ले जाने का काम तो\nवह करता ही रहा है कई साल से\n\nवह चुप हो जाता है थक कर बैठ जाता है\nजैसे ही लगता है कि उसकी बात पूरी हो चुकी है\n\nवह फिर बोल पड़ता है कहता है : मैं बूढ़ा हो गया हूँ\nकभी-कभी चिड़चिड़ा जाता हूँ\n\nसारी ग़लती लड़कों की ही नहीं है\nवे मन के इतने बुरे भी नहीं हैं\n\nहालात ही इतने बुरे हैं, उनका भी हाथ तंग रहता है\nउनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और वो मुझे बहुत प्यार करते हैं\n\nमेरा तो पूरा समय उन्हीं के साथ बीत जाता है\nफिर अचानक वह खड़ा हो जाता है कहता है\n\nहो सकता है वे मुझे ढूँढ़ रहे हों\nउनमें से कोई न कोई थोड़ी देर में ही मुझे लिवाने आ जाएगा\n\nआप अगर मेरे लड़कों में से किसी को जानते हों\nतो उससे कुछ मत कहिएगा\n\nसब ठीक हो जाएगा...\nसब ठीक हो जाएगा...\n\nबुदबुदाते हुए वह आगे चल देता है\nरात किसी का घर नहीं होती\n\nकिसी बेघर के लिए\nकिसी घर से निकाल दिए गए बूढ़े के लिए\n\nमेरे जैसे आवारा के लए\nरात किसी का घर नहीं होती\n\nउसके अँधेरे में आँसू तो छिप सकते हैं कुछ देर\nलेकिन सिर छिपाने की जगह वह नहीं देती\n\nमैं उस बूढ़े से पूछना चाहता हूँ\nपर...","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}