{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Tahniyan | Jaiprakash Kardam","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/a1217f89\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":132,"description":"टहनियाँ | जयप्रकाश कर्दमकाटा जाता है जब भी कोई पेड़बेजान हो जाती हैं टहनियां बिना कटे हीपेड़ है क्योंकि टहनियां हैंटहनियां हैं क्योंकि पेड़ हैअर्थहीन हैं एक दूसरे के बिनापेड़ और टहनियां ठूंठ हो जाता है पेड़टहनियों के अभाव मेंटहनियां हैं पेड़ का कुनबापेड़ ने देखा हैअपने कुनबे को बढते हुएटहनियों ने देखा है पेड़ को कटते हुएकटकर गिरने से पहलेअंतिम शंवास तक संघर्ष करते हुएटहनियां उदास हैं कि पेड़ कट गयापेड़ उदास है कि टहनियां कटेंगीउन पर भी चलेगी कुल्हाड़ीकटते रहेंगे कब तक पेड़ज़रूरतों के नाम परसूखते रहेंगे स्रोत टहनियों केक्यों ज़िंदा नहीं रह सकता पेड़अपनी टहनियों के साथ।","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}