{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Suitcase : New York Se Ghar Tak | Vishwanath Prasad Tiwari","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/a275bc64\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":206,"description":"सूटकेस : न्यूयर्क से घर तक | विश्वनाथ प्रसाद तिवारी \n\n\"इस अनजान देश में\nअकेले छोड़ रहे मुझे\"\nमेरे सूटकेस ने बेबस निगाहों से देखा\nजैसे परकटा पक्षी\nदेखता हो गरुड़ को\nउसकी भरी आँखों में क्या था\nएक अपाहिज परिजन की कराह\nया किसी डुबते दोस्त की पुकार\nकि उठा लिया उसे\nजिसकी मुलायम पसलियां टूट गई थीं\nहवाई यात्रा के मालामाल बक्सों बीच\nकमरे से नीचे लाया\nजमा कर दिया उसे होटल के लॉकरूम में\nइस बुरी नीयत के साथ\nकि छोड़ दूँगा यहीं\nयह अर्थहीन अस्थिपंजर\nमगर चलते वक्त हवाई अड्डे\nफिर उठा लिया उसे\nदो डॉलर चुकाकर\nजैसे कक्षा दो के अपने पुराने सहपाठी को\nजिसकी कीमत अब दो कौड़ी भी नहीं रह गई थी\nफिर नीयत खोट हुई\nहवाई अड्डे पर उसे छोड़ देने की\nमगर उसकी डबडबाई आकुल आँखें \nउस पिता जैसी लगीं\nजो नब्बे पार की उम्र में\nअकेले पड़े हों गाँव में\nमुझे लगा\nअभी खतरे के साइरन बजेंगे\nघेर लेंगे इसे सैनिक और जासूस\nरेशा-रेशा उधेड देंगे इसका\nजो एक कलाकृति था अपनी जवानी में\nउतरा जब दिल्ली हवाई अडडे\nउसकी पीठ और पेट\nचिपक गए थे एक में\nबदलू मुसहर की तरह\nजो भूख से भरा या मलेरिया से\nइस पर बरसों बहस चली थी\nमीडिया और संसद में\nदिल्ली में उससे छुड़ा लेना चाहता था पिंड\nजो चार बार विदेश यात्राओं में सहयात्री रहा\nमगर आखिर वह आ ही गया मेरे साथ गोरखपुर\nउस गाय की तरह\nजो गाहक के हाथ से पगहा झटककर\nलौट आई हो अपने पुराने खूटे पर\nऔर अब, वह मेरे पुराने सामानों बीच\nविजयी-सा मुस्करा रहा\nचुनौती देता और पूछता मुझसे\n\"क्या आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है\nउन्हें पीछे छोड़ देना\nजिनके पास भाषा नहीं है?\"","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}