{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Bhookhdaan | Mehboob","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/a4c2287b\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":145,"description":"भूखदान | महबूब  \n\nशांत अंधेरे सन्नाटे के बीच \nचीखती गुजरती एक आवाज़ \nलोहे के लोहे से टकराने की\nया उस भूखे पेट के गुर्राने की \nजो लेटा है उसी लोहे के सड़क किनारे \nकिसी भिनभिनाती-सी जगह पर \nखेल रही हैं कुछ मक्खियाँ उसके मुख पर\nजैसे वो जानती हों कि गरीब यहाँ सिर्फ खेलने की चीज है \nइस बीच कुछ लोग गुज़रे उधर से उसे निहारते हुए\nकोई हँसा कोई मुस्कुराया \nकिसी को घृणा हुई किसी ने अफसोस जताया \nआखिर करते भी क्या बेचारे \nइंसान जो ठहरे \nइनके पास कहाँ इतना वक्त \nकि जिस थाली के सिर्फ दो निवाले खाने के बाद \nउससे कूड़े दान का पेट भर दिया गया \nउसी थाली से उस पेट को भर दे\nजिसमें से आ रही थी वह सन्नाटे को चीरने वाली आवाज \nऔर वो शख्स अभी भी \nघुटनों से पेट को जकड़े हुए \nहाथों से घुटनों को पकड़े हुए\nइसी इंतज़ार में बैठा है कि कोई तो अपनी\nझूठी थाली कूड़ेदान को ना देकर भूखदान को देगा","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}