{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Nritya Aur Parikathayein | Anwesha Rai 'Mandakini'","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/b3547376\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":178,"description":"नृत्य और परिकथाएँ | अन्वेषा राय 'मंदाकिनी'\n\nमेरे पाँव,\nबचपन से थिरकते रहे,\nकिसी अनजान सवालिया धुन पर...\nमैं बढ़ती रही.. नाचती रही..\nमेरे जीवन का उद्देश्य यह खोज भर रहा\nकि मेरे इस जीवन संगीत का उद्गम कहाँ है ??\nमेरा यह कारवाँ जारी रहा...\nहर रोज़ मेरे पग उस संगीत की खोज में\nनृत्य करते चले गए !!\nमैं शायद नहीं जानती हूँ\nकि जीवन के किस रोज़\nमेरा परी-कथाओं से\nविश्वास का नाता जुड़ गया!\nपरी-राजकुमार को लाँघकर\nमैं एक दिन इन कहानियों को ही\nअपना सर्वस्व दे बैठी,\nऔर मेरी कहानियों ने\nशंका का लेशमात्र भी ताप नहीं सहा !\nशायद कहानियों की किताबें भी\nये जानती थी\nकि हर विश्वास कि कीमत\nएक राजकुमार नहीं होता !!\nमेरा नृत्य सबने देखा,\nपरिकथाएँ सुनाते वक्त\nमेरी आँखों की चमक भी\nसबको लुभाती रही...\nमगर हे प्रियतम,\nतुम्हारे सम्मुख मेरे यह पाँव\nमेरे काबू में नहीं रहे...\nएक दिन अचानक नाचते हुए यह रुक गए\nकि मेरी खोज पूरी हो चुकी थी,\nमेरे जीवन संगीत के स्त्रोत\nअब यह तुम्हारी धुन पर थिरकेंगे\nमृत्यु के पूर्व कभी ना रुकने के लिए..\nमेरे आँखों की यह चमक\nप्रेमाश्रु बन बह चुकी है\nतुम्हारी हथेलियों मे...\nलोग कहते हैं कि मेरी आँखें बोलती हैं -\n\"विश्वास की भाषा\"\nकहती हैं किे\nतुम इनको खालीपन से कभी नहीं भरोगे !!","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}