{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Thimpu - Bhutan | Gulzar","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/b548072a\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":211,"description":"थिंपू - भूटान | गुलज़ार पिछली बार भी आया थातो  इसी  पहाड़ नेनीचे खड़ा थामुझसे कहा थातुम लोगों के कद क्यूँ छोटे होते हैं ?आओ हाथ पकड़ लो मेरापसलियों पर पांव  रखो  ऊपर आ जाओआओ ठीक से चेहरा तो देखूं तुम कैसे लगते होजैसे मेरे चींटियों को तुम अलग अलग पहचान  नहीं सकतेमुझको भी तुम एक ही जैसे लगते हो सब एक ही फर्क हैमेरी कोई चींटी जो बदन पर चढ़ जाएतो चुटकी से पकड़ के फेक उसको मार दिया करते हो तुममैं ऐसा नहीं करतामेरे सरोवर  देखो,कितने उचें उचें कद हैं इनकेतुमसे सात गुना तो होंगेशायद दस या बारह गुना होउम्रे देखो उसकी तुम, कितनी बढ़ी हैं, सदियों जिंदा रहते  हैंकह देते हो कहने कोलेकिन अपने बड़ों की इज्ज़त करते नहीं तुमइसीलिए  तुम लोगों के कदशायद छोटे रह जाते हैंइतना अकेला नहीं हूँ मैंतुम जितना समझते होतुम ही लोग ही भीड़ में रहकर भी तनहा तनहा लगते होभरे हुए जब काफिले बादलों के जाते हैंझप्पा  डाल के मिल कर जाते हैं मुझसे दरिया भी उतरते  हैं तो पांव  छू  के विदा होते हैंमौसम मेहमान है आते हैं तो महीनों रह कर  जाते हैंअज़ल अज़ल के रिश्ते निभाते हैंतुम लोगों की  उम्रें देखता हूँकितनी छोटी छोटी मायादों  में मिलते और बिछड़ते होख्वाबें और उम्मीदें भीबस छोटी छोटी उम्रों जितनीइसीलिए क्यातुम लोगों के कद  इतने छोटे रह जाते हैं  ","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}