{"type":"rich","version":"1.0","provider_name":"Transistor","provider_url":"https://transistor.fm","author_name":"Pratidin Ek Kavita","title":"Tram Mein Ek Yaad | Gyanendrapati","html":"<iframe width=\"100%\" height=\"180\" frameborder=\"no\" scrolling=\"no\" seamless src=\"https://share.transistor.fm/e/b6f8ca3b\"></iframe>","width":"100%","height":180,"duration":216,"description":"ट्राम में एक याद - ज्ञानेन्द्रपति\n \nचेतना पारीक कैसी हो?\nपहले जैसी हो?\nकुछ-कुछ ख़ुुश\nकुछ-कुछ उदास\nकभी देखती तारे\nकभी देखती घास\nचेतना पारीक, कैसी दिखती हो?\nअब भी कविता लिखती हो?\n \nतुम्हें मेरी याद तो न होगी\nलेकिन मुझे तुम नहीं भूली हो\nचलती ट्राम में फिर आँखों के आगे झूली हो\nतुम्हारी क़द-काठी की एक\nनन्ही-सी, नेक\nसामने आ खड़ी है\nतुम्हारी याद उमड़ी है\n \nचेतना पारीक, कैसी हो?\nपहले जैसी हो?\nआँखों में अब भी उतरती है किताब की आग?\nनाटक में अब भी लेती हो भाग?\nछूटे नहीं हैं लाइब्रेरी के चक्कर?\nमुझ-से घुमन्तूू कवि से होती है टक्कर?\nअब भी गाती हो गीत, बनाती हो चित्र?\nअब भी तुम्हारे हैं बहुत-बहुत मित्र?\nअब भी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हो?\nअब भी जिससे करती हो प्रेम उसे दाढ़ी रखाती हो?\nचेतना पारीक, अब भी तुम नन्हीं सी गेंद-सी उल्लास से भरी हो?\nउतनी ही हरी हो?\n \nउतना ही शोर है इस शहर में वैसा ही ट्रैफ़िक जाम है\nभीड़-भाड़ धक्का-मुक्का ठेल-पेल ताम-झाम है\nट्यूब-रेल बन रही चल रही ट्राम है\nविकल है कलकत्ता दौड़ता अनवरत अविराम है\n \nइस महावन में फिर भी एक गौरैये की जगह ख़ाली है\nएक छोटी चिड़िया से एक नन्ही पत्ती से सूनी डाली है\nमहानगर के महाट्टहास में एक हँसी कम है\nविराट धक-धक में एक धड़कन कम है \nकोरस में एक कण्ठ कम है\nतुम्हारे दो तलवे जितनी जगह लेते हैं उतनी जगह ख़ााली है\nवहाँ उगी है घास वहाँ चुई है ओस \nवहाँ किसी ने निगाह तक नहीं डाली है\n \nफिर आया हूँ इस नगर में चश्मा पोंछ-पोंछ कर देखता हूँ\nआदमियों को किताबों को निरखता लिखता हूँ\nरंग-बिरंगी बस-ट्राम रंग बिरंगे लोग\nरोग-शोक हँसी-खुशी योग और वियोग\nदेखता हूँ अबके शहर में भीड़ दूनी है\nदेखता हूँ तुम्हारे आकार के बराबर जगह सूनी है\n \nचेतना पारीक, कहाँ हो कैसी हो?\nबोलो, बोलो, पहले जैसी हो?","thumbnail_url":"https://img.transistorcdn.com/CI1fAMbZA7bkv2hnc9u5BTEVfgUAS1MWnukNGfD53r4/rs:fill:0:0:1/w:400/h:400/q:60/mb:500000/aHR0cHM6Ly9pbWct/dXBsb2FkLXByb2R1/Y3Rpb24udHJhbnNp/c3Rvci5mbS9zaG93/LzQwNDQzLzE2ODA1/MzYzNTQtYXJ0d29y/ay5qcGc.webp","thumbnail_width":300,"thumbnail_height":300}